फ्री शिक्षा के बहाने गरीब और आदिवासी बच्चों का धर्मांतरण कराने के लिए राजस्थान से बाहर ले जाने का मामला सामने आया है। गिरोह इन बच्चों को बस से अहमदाबाद और फिर ट्रेन से गोवा लेकर पहुंचा था। गिरोह गोवा से बच्चों को तमिलनाडु ले जाने वाला था, लेकिन उससे पहले ही रेलवे पुलिस ने छुड़ा लिया। गिरोह से छुड़ाए गए बच्चों में 2 लड़कियां और 5 लड़के शामिल हैं, जिनकी उम्र 7 से 12 साल के बीच है। गोवा की बाल कल्याण समिति की सूचना पर उदयपुर से पुलिस और बाल कल्याण समिति की टीम गोवा पहुंची और शनिवार को सभी बच्चों को उदयपुर लेकर आई। धर्मांतरण के मामले को लेकर उदयपुर के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। सांसद ने मामले की एनआईए, सीबीआई और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) से जांच की मांग की है। झाड़ोल तहसील के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं बच्चे गिरोह से छुड़ाए गए सभी बच्चे उदयपुर जिले की झाड़ोल तहसील के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं। बच्चों ने पूछताछ में बताया कि वे झाड़ोल में भी चर्च जाया करते थे। 15 जुलाई को गिरोह के सदस्य बच्चों को बस से अहमदाबाद और फिर ट्रेन से गोवा लेकर पहुंचे थे। गोवा में एक साथ इतने बच्चों को देखकर किसी ने रेलवे पुलिस को सूचना दे दी थी। इस पर रेलवे पुलिस ने बच्चों को रेस्क्यू कर लिया। पूछताछ में बच्चों ने झाड़ोल के गांवों की जानकारी दी तो गोवा की बाल कल्याण समिति ने उदयपुर पुलिस और बाल कल्याण समिति को सूचना दी। कई बच्चों को पहले भी तमिलनाडु भेज चुका गिरोह जांच में सामने आया कि गिरोह पहले भी उदयपुर संभाग से कई बच्चों को तमिलनाडु भेजा जा चुका है। इनमें से 15 बच्चों की जानकारी तो साफ तौर पर मिल चुकी है। उदयपुर लाए जाने के बाद अब इन बच्चों, उनके माता-पिता और ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है। बाल कल्याण समिति और पुलिस की जांच के बाद ही बच्चों को उनके माता-पिता को सौंपा जाएगा। मामले की जानकारी मिलने पर विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री सुंदर कटारिया और उनकी टीम भी बाल कल्याण समिति पहुंची। पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेकर उच्च अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सांसद ने सीबीआई जांच की मांग की मामले को लेकर उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री को लेटर लिखा है। सांसद ने लिखा- इस पूरे खेल के पीछे कथित ईसाई मिशनरियों और एक बड़े नेटवर्क का हाथ सामने आ रहा है। उन्होंने मामले की गंभीरता, बहुस्तरीय साजिश और डिजिटल लेन-देन की आशंका को देखते हुए इसकी जांच के लिए एसआईटी के गठन की मांग की है, ताकि इस अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हो सके। फ्री पढ़ाई का लालच देकर दूसरे राज्यों में भेजता है गिरोह सांसद डॉ. रावत ने बताया- उदयपुर संभाग के कानुवाड़ा, बिछीवाड़ा और कलिंजरा जैसे इलाकों में ऐसे 15 से ज्यादा मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों के जागरूक होने और विरोध बढ़ने के बाद इस गिरोह ने अपना तरीका बदल लिया है। अब ये बच्चों को बहला-फुसलाकर और फ्री पढ़ाई का लालच देकर दूसरे राज्यों में भेज रहे हैं, ताकि वहां चुपचाप उनका धर्मांतरण किया जा सके और उन्हें अपनी मूल संस्कृति से अलग किया जा सके।
