फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से देशभर में पहचान बनाने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस, वेलनेस एडवोकेट और पशु कल्याण समर्थक भाग्यश्री ने जयपुर के आमेर किले में हाथियों की सवारी बंद करने की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन अभियान से जुड़ते हुए कहा कि हाथी मनोरंजन का साधन नहीं है। संवेदनशील और बुद्धिमान वन्यजीव है। जिन्हें प्राकृतिक आवास में ही सम्मान और स्वतंत्रता के साथ जीने का अधिकार मिलना चाहिए। भाग्यश्री ने कहा- जयपुर की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, शाही विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों से है। आमेर किला यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। यहां हर दिन हजारों देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। लेकिन इन खूबसूरत तस्वीरों के पीछे एक ऐसी सच्चाई भी छिपी है, जिससे अधिकांश लोग अनजान हैं। उन्होंने कहा- पर्यटक केवल सजे-धजे हाथियों को देखते हैं, लेकिन उन हाथियों की पीड़ा और कैद का जीवन उनकी नजरों से गायब रहता है। 80 हाथी रोज पर्यटकों को ढोने के लिए मजबूर उन्होंने बताया- जब आमेर में हाथियों की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी मिली तो वे बेहद व्यथित हो गई। लगभग 80 हाथी रोजाना तेज धूप में पर्यटकों को ढोने के लिए मजबूर किए जाते हैं। सवारी के बाद भी उन्हें लंबे समय तक जंजीरों से बांधकर रखा जाता है। पर्याप्त भोजन, चिकित्सा सुविधा और प्राकृतिक वातावरण से वंचित रखा जाता है। कई हाथियों को हाथी गांव में भी लगातार काम करना पड़ता है। इससे उनका शारीरिक और मानसिक शोषण होता है। भाग्यश्री ने कहा- उन्हें बचपन से ही जानवरों के प्रति करुणा और संवेदनशीलता का संस्कार मिला है। एक यात्री के रूप में केन्या के मासाई मारा में हाथियों-शेरों और राजस्थान के जवाई में तेंदुओं को उनके प्राकृतिक आवास में देखा है। जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण करते हाथियों को देखने और कैद में जंजीरों से बंधे हाथियों को देखने का अंतर बेहद दर्दनाक है। हाथी अत्यंत संवेदनशील जीव उन्होंने कहा- हाथी अत्यंत संवेदनशील जीव हैं। वे इंसानों की तरह परिवार बनाते हैं, अपने बच्चों की देखभाल करते हैं। खुशी, दुख, डर और अकेलेपन जैसी भावनाओं को महसूस करते हैं। जंगल में वे प्रतिदिन कई किलोमीटर तक चलते हैं। नदियां पार करते हैं। समूह में रहते हैं। ऐसे जीवों को केवल कुछ मिनट के मनोरंजन के लिए कैद में रखना अमानवीय है। भाग्यश्री ने सबसे अधिक चिंता हाथियों के ट्रेनिंग की प्रक्रिया को लेकर जताई। उन्होंने कहा- कई हाथियों को बचपन में ही उनकी मां से अलग कर दिया जाता है। उन्हें ‘द क्रश’ जैसी क्रूर प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, ताकि उनका प्रतिरोध खत्म हो जाए। वे इंसानों के आदेश मानने लगें। यह सोचकर भी मन विचलित हो जाता है कि केवल पर्यटकों के मनोरंजन के लिए इन मासूम जानवरों को इतना मानसिक और शारीरिक कष्ट सहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश पर्यटक इस सच्चाई से अनजान रहते हैं। वे केवल हाथी की सवारी को एक पर्यटन अनुभव मानते हैं। इसके पीछे छिपे दर्द और शोषण को नहीं देख पाते। भारत ने हाथी को राष्ट्रीय विरासत पशु का दर्जा दिया है, इसलिए उसके साथ इस तरह का व्यवहार हमारी संस्कृति और मूल्यों के विपरीत है। हाथियों का वास्तविक घर जंगल है, न की कैद या पर्यटन स्थल भाग्यश्री ने कहा- राजस्थान की संस्कृति और विरासत का सम्मान पशुओं के साथ क्रूरता किए बिना भी किया जा सकता है। सच्ची विरासत वही है, जिसमें जीवन के प्रति करुणा, संवेदना और सम्मान दिखाई दे। हाथियों का वास्तविक घर जंगल है, न कि कैद या पर्यटन स्थल। उन्होंने वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन के साथ खड़े होकर आमेर में हाथी सवारी बंद करने तथा सभी हाथियों को सुरक्षित अभयारण्यों में पुनर्वासित करने की मांग की, ताकि वे अपना शेष जीवन सम्मान, देखभाल और स्वतंत्रता के साथ बिता सकें। इस अभियान के तहत वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन ने राजस्थान के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र लिखकर आमेर में हाथी सवारी समाप्त करने की मांग की है। संस्था ने यह भी बताया कि हाल ही में ‘चंचल’ नामक हाथी की मृत्यु के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। चंचल को एक विदेशी कलाकार के फोटोशूट के लिए रंगा गया था, जिसके बाद पशु कल्याण को लेकर कई सवाल उठे। भाग्यश्री का इस अभियान से जुड़ना बड़ा कदम भारत में वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन के कंट्री डायरेक्टर गजेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि भाग्यश्री जैसी संवेदनशील और लोकप्रिय हस्ती का इस अभियान से जुड़ना पशु संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है। उम्मीद है कि राजस्थान सरकार इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेगी। वहीं संस्था के वाइल्डलाइफ कैंपेन मैनेजर शुभोब्रतो घोष ने कहा कि भाग्यश्री ने हाथियों के प्रति हो रही क्रूरता के खिलाफ जिस मजबूती से अपनी आवाज उठाई है, वह सराहनीय है। उनका सहयोग आमजन में जागरूकता बढ़ाने और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती देगा।