जन्माष्टमी के मौके पर कृष्णधाम सांवलियाजी इस बार पहले से कहीं ज्यादा भव्य नजर आया। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हर तरफ कुछ नया देखने को मिला। मुख्य मंदिर से लेकर प्रवेश कॉरिडोर, गार्डन, मीरा सर्कल और पूरे कस्बे तक फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजावट की गई। दिन में फूलों की खुशबू और सुंदर झांकियां श्रद्धालुओं को आकर्षित करती रहीं, वहीं रात होते ही पूरा मंदिर परिसर रोशनी से जगमगा उठा। मंदिर में प्रोजेक्शन मैपिंग के साथ नई तकनीक की लाइटिंग भी शुरू की गई। इसके कारण मंदिर की सुंदरता और भी बढ़ गई। मंदिर में पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने सजावट, झांकियों और रोशनी का आनंद लिया और कई लोग अपने मोबाइल में इसकी तस्वीरें और वीडियो भी कैद करते नजर आए। 20 टन फूलों से सजा मंदिर, तीन दिन तक चली तैयारी जन्माष्टमी के लिए मंदिर के बाहरी चौक और प्रवेश कॉरिडोर को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया। मंदिर की दोनों छतों की किनारियों पर फूलों की बंदनवार लगाई गई, जबकि अंदर फूलों के गुच्छों और झूमरों से आकर्षक सजावट की गई। यह पूरी पुष्प सजावट गुप्त श्रद्धालुओं के सहयोग से करवाई गई। दिल्ली की उत्सव वेडिंग कंपनी ने करीब 15 लाख रुपए की लागत से यह काम किया। इसके लिए कोलकाता से आए 45 कारीगर लगातार तीन दिन और रात तक जुटे रहे। सजावट में करीब 20 टन फूलों और हरे पत्तों का उपयोग किया गया। गेंदा, कनेर, गुलाब, मोगरा, मेरीगोल्ड, एंथोरियम, कारनेशन, हाइड्रेंजिया सहित कई देशी और विदेशी फूलों का इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर फूलों की खुशबू और रंगों से भर गया। फूलों से बनीं भगवान श्रीकृष्ण की झांकियां, श्रद्धालुओं का मन मोह लिया इस बार फूलों से बनाई गई विशेष झांकियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। कलाकारों ने मुरली बजाते भगवान श्रीकृष्ण की सुंदर आकृति तैयार की। इसके अलावा तिरुपति बालाजी के शंख, चक्र, गदा, पद्म और तिलक की झांकी भी फूलों से बनाई गई। माखन मटके की झांकी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। मंदिर के प्रवेश हॉल में भगवान श्रीकृष्ण, राधा-कृष्ण, भगवान शिव और गणेशजी की चलित (ऑटोमैटिक) झांकियां लगाई गईं। इन झांकियों में भगवान के अलग-अलग स्वरूप चलते हुए दिखाई दिए, जिन्हें देखने के लिए दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इन झांकियों को देखकर उत्साहित नजर आए। रात में रोशनी से चमका पूरा मंदिर, पहली बार प्रोजेक्शन मैपिंग भी शुरू जन्माष्टमी पर इस बार मंदिर में सिर्फ फूलों की सजावट ही नहीं, बल्कि खास विद्युत सजावट भी की गई। मुख्य मंदिर, प्रवेश कॉरिडोर, मीरा सर्कल और प्रवेश द्वार को हजारों लाइटों से सजाया गया। मंदिर के पास बने गार्डन में नई तकनीक से ऐसी लाइटिंग की गई कि रात में पूरा परिसर सितारों की तरह चमकता दिखाई दिया। पेड़ों, पौधों और उनकी शाखाओं पर भी अलग-अलग रंगों की रोशनी की गई, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय बन गया। सजावट के लिए करीब 40 शार्पी लाइट, 800 पार लाइट, 25 हजार सीरिज लाइट, 5 हजार फ्लड लाइट, झूमरों में 10 हजार बल्ब और 200 बर्ड (चिड़िया) लाइट लगाई गईं। मंदिर पर पहले से लगी स्थायी लाइटिंग के जरिए लगातार बदलते रंगों और अलग-अलग डिजाइन की रोशनी दिखाई गई। इसके साथ ही पहली बार प्रोजेक्शन मैपिंग की शुरुआत भी की गई, जिससे रात के समय मंदिर की खूबसूरती कई गुना बढ़ गई। भक्ति के साथ आकर्षण का भी बना केंद्र जन्माष्टमी पर इस बार सांवलियाजी मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना का ही नहीं, बल्कि आकर्षक सजावट का भी बड़ा केंद्र बना रहा। फूलों की सजावट, भगवान की झांकियां, रंग-बिरंगी रोशनी और नई तकनीक से की गई लाइटिंग ने श्रद्धालुओं को अलग अनुभव दिया। दिनभर मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु सजावट को निहारते रहे और रात में जगमगाते मंदिर की खूबसूरती देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचे। जन्माष्टमी के इस विशेष आयोजन ने मंदिर की भव्यता को नई पहचान दी और श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व लंबे समय तक यादगार बन गया।