कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली बॉक्सर अरुंधति ने कहा कि ये उनके सफर की मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। जब मैंने बॉक्सिंग शुरू की थी, तब पिता से लोग कहते थे कि लड़की को खेल में भेजोगे तो उसकी जिंदगी खराब हो जाएगी। तब पिता ने कहा था कि बॉक्सिंग तुम्हारा शौक है, मजबूरी नहीं। हमेशा अपनी सीमाएं और अपने लक्ष्य याद रखना। मैंने हमेशा उसी बात को ध्यान में रखा और कभी अपने रास्ते से नहीं भटकी। यही सोच मुझे आज यहां तक लेकर आई है। ये बात अरुंधति ने खिलाड़ियों की सुरक्षा और असुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल के जवाब पर कही। अरुंधति का अब ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने का सपना है। अरुंधति आज जयपुर पहुंचीं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अरुंधति ने अपने संघर्ष, परिवार के सहयोग, ओलिंपिक की तैयारी, राजस्थान में खेलों की स्थिति और महिला खिलाड़ियों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात की। पढ़िए- पूरा इंटरव्यू सवाल: गोल्ड मेडल जीतकर राजस्थान और देश का नाम रोशन करने के बाद कैसा महसूस कर रही हैं? अरुंधति: बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। राजस्थान के लोगों से जितना प्यार और समर्थन मिला है, उसने मुझे और ज्यादा प्रेरित किया है। लोगों का यह विश्वास मुझे आगे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मोटिवेट करता है। अब मेरी कोशिश रहेगी कि भविष्य में इससे भी बेहतर प्रदर्शन करूं और देश के लिए और बड़े पदक जीतकर लाऊं। सवाल: यहां तक पहुंचने का सफर कितना कठिन रहा? क्या रास्ता संघर्षों से भरा था? अरुंधति: संघर्ष हर इंसान की जिंदगी का हिस्सा होता है। चाहे कोई खिलाड़ी हो या पढ़ाई करने वाला छात्र, हर किसी को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि उन मुश्किलों से कौन कैसे बाहर निकलता है। खिलाड़ी के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना सबसे जरूरी है। अगर आप मेंटली टफ है तो किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकते हैं। मेरे लिए यह उपलब्धि अंतिम लक्ष्य नहीं है। यह तो सिर्फ शुरुआत है। मेरा सपना ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का तिरंगा सबसे ऊपर लहराना है। सवाल: राजस्थान में बॉक्सिंग के खिलाड़ियों को अभी भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही है, इस पर आपकी क्या राय है? अरुंधति: मुझे लगता है कि राजस्थान में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यहां के खिलाड़ी किसी भी राज्य से कम नहीं। बल्कि कई मामलों में हरियाणा से भी बेहतर खिलाड़ी यहां मौजूद है। हमारे बच्चों की हाइट, हेल्थ और स्ट्रेंथ काफी अच्छी है। फर्क सिर्फ इतना है कि हरियाणा में खेलों का माहौल ज्यादा मजबूत है। वहां खिलाड़ियों को बचपन से बेहतर सुविधाएं, प्रतियोगिताएं और प्रोत्साहन मिलता है। अगर राजस्थान में भी वैसा ही माहौल तैयार हो जाए तो यहां के खिलाड़ी भी ओलिंपिक में पहुंचकर देश के लिए मेडल जीत सकते हैं। सवाल: ओलिंपिक की तैयारी राजस्थान से करेंगी या किसी दूसरे शहर में? अरुंधति: ओलिंपिक की तैयारी मैं पटियाला में करूंगी। वहीं राष्ट्रीय बॉक्सिंग कैंप आयोजित होगा और उसी कैंप में रहकर मैं अपनी तैयारी करूंगी। मैं इंडियन आर्मी का भी हिस्सा हूं, इसलिए आर्मी स्पोट्र्स इंस्टीट्यूट में भी ट्रेनिंग जारी रहेगी। मेरा पूरा फोकस अब ओलिंपिक की तैयारी पर है। सवाल: नए खिलाड़ियों को क्या संदेश देना चाहेंगी? अरुंधति: मैं 10 साल से खेल रही हूं। इस पूरे सफर में मुझे जीत से ज्यादा हार मिली है। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रही। सबसे जरूरी चीज निरंतरता है। अगर आप लगातार मेहनत करते रहेंगे और अपने लक्ष्य पर टिके रहेंगे, तो मेहनत का फल जरूर मिलेगा। सफलता देर से मिल सकती है, लेकिन मिलती जरूर है। सवाल: क्या बचपन से ही आपकी रुचि खेलों में थी या पढ़ाई में भी अच्छी थी? अरुंधति: मैं पढ़ाई और खेल दोनों में अच्छी थी। मैं राजस्थान के कोटा शहर से हूं, जहां पढ़ाई का माहौल पूरे देश में अलग पहचान रखता है। मेरे पिता भी चाहते थे कि मैं आईआईटी के जरिए अपना करियर बनाऊं। लेकिन जब उन्होंने देखा कि मेरी रुचि बॉक्सिंग में है, तो उन्होंने अपनी सोच बदल दी। सिर्फ मेरे पिता ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार ने मेरा साथ दिया और मुझे खेल में आगे बढ़ने का पूरा मौका दिया। आज मैं जिस मुकाम पर हूं, उसमें मेरे परिवार का सबसे बड़ा योगदान है। मुझे खुशी है कि अब कोटा में भी हजारों परिवार बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। वहां से भविष्य में कई बड़े खिलाड़ी निकलेंगे। सवाल: आपके सबसे कठिन दौर में किसने सबसे ज्यादा साथ दिया? अरुंधति: मेरे पिता मेरे सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम रहे हैं। उन्हें मुझ पर हमेशा ज्यादा भरोसा रहा। जब भी मैं किसी हार के बाद निराश होती थी या खुद पर विश्वास खोने लगती थी, तब मेरे पिता मुझे मेरी ताकत याद दिलाते थे। वह हमेशा कहते थे कि तुम्हारा सपना ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है, इसलिए अभी रुकना नहीं है। उनकी बातें मुझे दोबारा आत्मविश्वास देती थीं और मैं फिर से पूरी मेहनत के साथ अभ्यास में जुट जाती थी। सवाल: पिछले कुछ समय में महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और असुरक्षा को लेकर कई सवाल उठे हैं, आप इसे कैसे देखती हैं? अरुंधति: अगर आप खुद अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार है और सही रास्ते पर चलते हैं तो किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आती। जब मैंने बॉक्सिंग शुरू की थी, तब लोगों की सोच अलग थी। कई लोग मेरे पिता से कहते थे कि लड़की को खेल में भेजोगे तो उसकी जिंदगी खराब हो जाएगी। लेकिन मेरे पिता ने मुझसे सिर्फ एक बात कही थी कि बॉक्सिंग तुम्हारा शौक है, मजबूरी नहीं। इसलिए हमेशा अपनी सीमाएं और अपने लक्ष्य याद रखना। मैंने हमेशा उसी बात को ध्यान में रखा और कभी अपने रास्ते से नहीं भटकी। यही सोच मुझे आज यहां तक लेकर आई है। — ये खबर भी पढ़िए- अरुंधति चौधरी से जुड़ी ये 2 खबरें भी पढ़िए… 1.कोटा की अरुंधति ने कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीता:फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड की बॉक्सर को तीनों राउंड में दी शिकस्त, परिवार खुशी से झूम उठा कॉमनवेल्थ गेम्स- 2026 में कोटा की बेटी अरुंधति चौधरी ने बॉक्सिंग के 70 किग्रा वर्ग के फाइनल मुकाबले में गोल्ड मैडल जीत लिया है। अरुंधति ने शानदार खेल दिखाते हुए तीनों राउंड में इंग्लैंड की खिलाड़ी को हराया। अरुंधति की जीत के बाद चाचा, बड़ी बहन और छोटे भाई सहित पूरे परिवार खुशी से झूम उठा। (पूरी खबर पढ़ें) 2. राजस्थान की ‘गोल्डन गर्ल’ अरुंधति लड़कों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटती थी:बिना झिझके बॉक्सिंग चुनी, पिता ने बेटी के लिए खोला डेयरी फार्म; कॉमनवेल्थ में बनाया इतिहास कोटा की बेटी अरुंधति ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में इतिहास रच दिया है। अरुंधति ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की बॉक्सिंग (70 किलोग्राम भार वर्ग) में गोल्ड मेडल जीतकर न सिर्फ कोटा, बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है। अरुंधति ने शनिवार को हुए फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड की खिलाड़ी चैंटेल रीड को एकतरफा शिकस्त दी। (पढ़ें पूरी खबर) 3. ‘गोल्डन गर्ल’ अरुंधति चौधरी बोलीं- सपनों के लिए लड़ो:365 दिन मेहनत करते हैं, बुखार से फर्क नहीं पड़ता; कॉमनवेल्थ में बॉक्सिंग में जीता गोल्ड कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कोटा की अरुंधति चौधरी ने बॉक्सिंग के 70 किलोग्राम वेट कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता है। (पढ़िए पूरी खबर)
