राजस्थान के भीलवाड़ा ने डिजिटल ऑर्गन डोनेशन अभियान में देश में पहला स्थान हासिल किया। गुजरात का अहमदाबाद दूसरे नंबर पर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर चलाए गए डिजिटल ऑर्गन डोनेशन अभियान को भीलवाड़ा कलेक्टर जसमीत संधू ने जनआंदोलन बना दिया। 1 जुलाई से 31 जुलाई तक चले अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने शहर से लेकर गांवों तक लगातार जनजागरण किया। टीम ने लोगों से सीधे संवाद कर अंगदान और देहदान का महत्व समझाया। नतीजा, जिले के करीब 24 हजार 400 लोगों ने ऑनलाइन संकल्प पत्र भरकर अंगदान और देहदान के लिए अपनी सहमति दी। जिले की उपलब्धि पर 5 अगस्त(बुधवार) को जयपुर में हुए समारोह में कलेक्टर जसमीत संधू और सीएमएचओ डॉ. संजीव शर्मा को सम्मानित किया गया। पहले पढ़िए… क्या होता है अंगदान पीएम की पहल के बाद घर-घर पहुंची टीम
सीएमएचओ डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि यह सम्मान केवल प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों की संवेदनशील सोच का भी सम्मान है, जिन्होंने मृत्यु के बाद भी किसी को जीवन देने का संकल्प लिया। पीएम की पहल पर जिले में एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं, बीसीएमओ और मेडिकल टीम ने घर-घर पहुंचकर लोगों को अंगदान(ऑर्गन डोनेशन) के लिए प्रेरित किया और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया। लोगों को समझाया गया कि एक व्यक्ति के अंग कई जरूरतमंदों को नया जीवन दे सकते हैं। दिल(हार्ट), लीवर, किडनी, आंखों सहित कई ऑर्गन के ट्रांसप्लांट होने से दूसरों के काम आ सकते हैं। इसी का असर रहा कि बड़ी संख्या में लोगों ने स्वेच्छा से अंगदान का संकल्प लिया। ऑनलाइन संकल्प पत्र भरकर दे सकते हैं सहमति
सीएमएचओ डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि अंगदान या देहदान की प्रक्रिया पूरी तरह सरल है। इच्छुक व्यक्ति ऑनलाइन संकल्प पत्र भरकर अपनी सहमति दर्ज करा सकता है। दानदाता की मृत्यु के बाद परिजनों की सहमति मिलने पर संबंधित मेडिकल कॉलेज या हॉस्पिटल की टीम जरूरी प्रोसेस पूरी करती है। राजस्थान में इसके लिए कई संस्थाएं भी हैं। अभियान के दौरान मेडिकल टीम ने लोगों से व्यक्तिगत स्तर पर संवाद किया। गांवों और शहरों में लगातार संपर्क अभियान चलाकर लोगों को अंगदान के सामाजिक महत्व से अवगत कराया गया। यही वजह रही कि भीलवाड़ा के लोगों ने इस अभियान में अच्छी भागीदारी निभाई और भीलवाड़ा जिला राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर पहुंच गया। डोनर बोले- किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचा सकते है
अंगदान का संकल्प लेने वाले कुलदीप शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मिलने के बाद उन्होंने ऑनलाइन फॉर्म भरकर सहमति दी। उन्होंने कहा कि यदि उनके जाने के बाद उनके अंग किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचा सकें तो इससे बड़ा संतोष नहीं हो सकता। उन्होंने दूसरे लोगों से इस काम से जुड़ने की अपील की।

You missed