पठानकोट जिले के शाहपुरकंडी में बैराज औसती संघर्ष कमेटी जैनी से जुड़े 2 बुजुर्गों 85 वर्षीय शर्म सिंह और 81 वर्षीय कुलविंदर सिंह का 200 फीट ऊंचे हाई-वोल्टेज टावर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार सुबह 10 बजे से टावर पर चढ़े दोनों बुजुर्गों का प्रदर्शन 58 घंटे के समय को पार कर चुका है। भीषण गर्मी और ढलती उम्र के कारण टावर पर बैठे दोनों बुजुर्गों की तबीयत लगातार बिगड़ रही है, लेकिन वे अपनी मांगों को लेकर नीचे उतरने से साफ इनकार कर चुके हैं। इस बीच, सुजानपुर हलके के नेताओं और मौजूदा विधायक की अनुपस्थिति को लेकर ‘बैराज औसती संघर्ष कमेटी’ के प्रधान दयाल सिंह ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए आगामी चुनावों में सभी नेताओं का बहिष्कार करने और उन्हें काले झंडे दिखाने की खुली चेतावनी दे दी है। वोट मांगने आते हैं, 48 घंटे बीतने पर भी हाल जानने कोई नेता नहीं आया: प्रधान
संघर्ष कमेटी के प्रधान दयाल सिंह ने वीडियो संदेश जारी कर प्रशासनिक और राजनीतिक उपेक्षा पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि सुजानपुर हलके में एक दर्जन से अधिक बड़े राजनीतिक नेता हैं, जो वोटों के समय घर-घर चक्कर काटते हैं। लेकिन पिछले 48 घंटों से जीवन और मृत्यु की जंग लड़ रहे बुजुर्गों का हाल जानने न तो कोई स्थानीय नेता पहुंचा है और न ही क्षेत्र के मौजूदा विधायक। झूठ के साथ नेता, सच के साथ कोई नहीं: उन्होंने आरोप लगाया कि जब गलत तरीके से भर्ती किए गए कर्मचारियों को टर्मिनेट किया गया था, तब सारे नेता उनके पीछे घूम रहे थे। लेकिन 33-34 सालों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे प्रभावित किसानों और बुजुर्गों के सच के साथ खड़ा होने के लिए कोई तैयार नहीं है। चुनावों में काले झंडे दिखाने की चेतावनी: प्रधान ध्यान सिंह ने प्रभावित 17 गांवों की जमीन अधिग्रहण वाली कमेटियों और ग्रामीणों से अपील की है कि आगामी चुनावों में अपनी राजनीति चमकाने आने वाले स्थानीय नेताओं का गांवों में प्रवेश रोककर काले झंडे लेकर पुरजोर विरोध किया जाए और उन्हें सार्वजनिक रूप से आईना दिखाया जाए। सुरक्षा इंतजामों की खुली पोल: वॉलीबॉल नेट से भी कमजोर सुरक्षा जाल घटनास्थल पर मौजूद कमेटी सदस्यों और प्रत्यक्षदर्शियों ने पठानकोट प्रशासन व पुलिस के सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। टावर के नीचे बिछाया गया जाल वॉलीबॉल के नेट से भी ज्यादा कमजोर और छोटा है। यह जाल केवल टावर के अंदरूनी हिस्से में लगा है, जबकि बाहर कोई सुरक्षा नहीं है। 200 फीट की ऊंचाई से गिरने की स्थिति में यह जाल जान बचाने में पूरी तरह असमर्थ है। 200 मीटर दूर आराम फरमा रही पुलिस: मौके पर तैनात पुलिस और प्रशासनिक कर्मचारी टावर से करीब 200 मीटर दूर शेड लगाकर बैठे हुए हैं। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी वहां ताश खेलकर समय बिता रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव: मौके पर एम्बुलेंस की कोई पक्की व्यवस्था नहीं है। 112 नंबर पुलिस की गाड़ी भी केवल 2-2 घंटे के लिए आती है और लंच टाइम में चली जाती है। केवल फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी खड़ी की गई है। बुजुर्गों की साइकिलें टावर के नीचे: दोनों बुजुर्ग जिस साइकिल से मंगलवार सुबह आए थे, वह टावर के नीचे ही खड़ी है। 58 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ठोस समाधान के बजाय केवल खानापूर्ति की जा रही है। क्या हैं मुख्य मांगें और आगे का रुख? टावर पर चढ़े शर्म सिंह (85) और कुलविंदर सिंह (81) का कहना है कि वे कई बार बांध प्रशासन और जिला अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन दिया गया। बैराज बांध से प्रभावित 17 गांवों के परिवारों को पक्का रोजगार दिया जाए। इसके अलावा गलत और गैर-कानूनी तरीके से भर्ती किए गए कर्मचारियों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें हटाया जाए। उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी: निगरान अभियंता बैराज बांध प्रशासन के निगरान अभियंता कुलविंदर सिंह का कहना है कि उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है। बातचीत से हल निकलेगा। लेकिन, उसके लिए बुजूर्गों को नीचे उतरना होगा। हालांकि, संघर्ष कमेटी ने साफ कर दिया है कि यदि बुजुर्गों को कोई शारीरिक नुकसान होता है, तो इसके लिए पठानकोट जिला प्रशासन और डैम प्रशासन सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।
