तरनतारन पट्टी स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा बाबा बिधि चंद जी, भट्ठ साहिब में वार्षिक जोड़ मेला श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। यह मेला बहादुर बाबा बिधि चंद जी के जलते हुए भट्ठ में बैठने की ऐतिहासिक घटना की याद में हर साल मनाया जाता है। कार्यक्रम दल पंथ संप्रदाय निहंग जत्थेबंदी के 12वें जानशीन प्रमुख जत्थेदार संत बाबा अवतार सिंह जी सुरसिंह की अगुवाई में संपन्न हुए। इस दौरान जहाँ धार्मिक दीवान सजाए गए, वहीं गुरुद्वारा चुबारा साहिब में अमृत संचार भी करवाया गया। धार्मिक दीवान और गुरबाणी की गूंज गुरुद्वारा भट्ठ साहिब में पाठों की लड़ी के भोग डाले गए, जिसके बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्रछाया में खुले पंडालों में विशाल धार्मिक दीवान सजाए गए। कथावाचकों और जत्थों का समागम विश्व प्रसिद्ध कथावाचक भाई पिंदरपाल सिंह और भाई गुरदेव सिंह ऑस्ट्रेलिया वालों ने बाबा बिधि चंद जी के जीवन, उनके महान योगदान और सिख इतिहास से संगत को निहाल किया। ढाडी व कीर्तनी जत्थों ने किया भाव विभोर दल बाबा बिधि चंद जी के ढाडी जत्थों और बाबा बिधि चंद खालसा अकादमी के जत्थों ने गुरु जस गाकर संगत को भावविभोर कर दिया। शाम को अरदास के बाद दीवानों की समाप्ति हुई। नगाड़े की चोट पर निकला मोहल्ला, दिखे प्राचीन युद्ध कला के करतब दीवानों की समाप्ति के बाद नगाड़े की चोट के साथ निहंग सिंहों द्वारा भव्य मोहल्ला निकाला गया। हाथियों और घोड़ों पर सवार होकर बड़ी संख्या में निहंग सिंहों ने सिखों की प्राचीन युद्ध कला और जांबाजी की परंपराओं का शानदार प्रदर्शन किया। दल पंथ बाबा बिधि चंद जी के सिंहों ने घुड़दौड़, नेजाबाजी और गतका के अद्भुत करतब दिखाए। इसके अतिरिक्त खेल मुकाबले जैसे कबड्डी और कुश्तियों का भी आयोजन किया गया। संत-महापुरुषों और प्रमुख शख्सियतों की उपस्थिति इस धार्मिक समागम में देश-विदेश से भारी संख्या में संगत और कई प्रमुख धार्मिक व राजनीतिक शख्सियतें शामिल हुईं।समागम के अंत में जत्थेदार संत बाबा अवतार सिंह जी सुरसिंह ने मेले में पहुँचे सभी संत-महापुरुषों, धार्मिक शख्सियतों, सेवादारों और देश-विदेश से आई संगत का धन्यवाद किया। इस अवसर पर आई हुई प्रमुख शख्सियतों और संतों को सिरोपे भेंट कर विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया।
