जालंधर के ऐतिहासिक कस्बे नूरमहल के निवासियों ने स्थानीय निकाय मंत्री हरजोत सिंह बैंस से हस्तक्षेप कर नूरमहल पुलिस स्टेशन की पिछले कई वर्षों से अधूरी पड़ी इमारत का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा करवाने की मांग की है। गौरतलब है कि पुलिस स्टेशन के लिए आवंटित की गई जमीन का हस्तांतरण (ट्रांसफर) सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद से ही निर्माण कार्य पूरी तरह अधर में लटका हुआ है। स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक ने नूरमहल नगर परिषद को सूचित किया है कि 11 जून 2012 को पारित प्रस्ताव संख्या 40, जिसके तहत पुलिस विभाग को थाना बनाने के लिए 6 कनाल 18 मरला भूमि हस्तांतरित करने की मंजूरी दी गई थी, उसे भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के आधार पर रद्द कर दिया गया है। वर्तमान में, 6 कनाल 14 मरला भूमि का हस्तांतरण संयुक्त मालिकों के नाम पर पंजीकृत है, जिससे यह कानूनी स्थिति और अधिक उलझ गई है। सुप्रीम कोर्ट के ही दूसरे फैसले का दिया तर्क इलाके के लोगों और कानूनविदों का तर्क है कि इस मामले में विभाग द्वारा की गई कार्रवाई उचित नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य ऐतिहासिक निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों को ग्राम सभा/ग्राम पंचायत या स्थानीय निकायों की भूमि पर से अवैध और अनाधिकृत कब्जेदारों को हटाने के लिए नीतियां बनाने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि ऐसी सार्वजनिक भूमि का नियमितीकरण (Regularization) केवल विशेष और असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। विशेष परिस्थितियां जिन पर जनता दे रही है जोर यदि वह भूमि किसी सरकारी योजना के तहत भूमिहीन मजदूरों या अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के लोगों को पट्टे पर दी गई हो, या फिर उस भूमि पर पहले से ही कोई स्कूल, औषधालय (डिस्पेंसरी) या कोई अन्य सार्वजनिक उपयोग की सुविधा/इमारत मौजूद हो। जनता का दावा है कि चूंकि पुलिस स्टेशन एक अत्यंत महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा और सुरक्षा से जुड़ी इमारत है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत नूरमहल नगर परिषद का प्रस्ताव संख्या 40 पूरी तरह से कानून सम्मत और स्वीकार्य है। इसे रद्द नहीं किया जाना चाहिए था। जनता ने दान की थी जमीन और 25 लाख रुपये पत्र में यह भी याद दिलाया गया कि वर्ष 2005 में नूरमहल पुलिस स्टेशन एक निजी और खस्ताहाल इमारत में चल रहा था। तब शहर के जागरूक निवासियों ने खुद पहल करते हुए पुलिस स्टेशन के लिए 6 कनाल 18 मरला भूमि दान की थी। यही नहीं, स्थानीय लोगों ने अपनी जेब से 25 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि इकट्ठा करके पुलिस स्टेशन की इमारत का बुनियादी निर्माण भी करवाया था। इतना सब होने के बावजूद, सरकारी अधिकारियों और संबंधित विभाग की लापरवाही के कारण इस इमारत को पूरा करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। क्षेत्र के निवासियों ने कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस से मांग की है कि इस जनहित के मामले में तुरंत तकनीकी व कानूनी अड़चनों को दूर कर थाने की अधूरी इमारत का काम शुरू करवाया जाए।
