राजस्थान में हाईटेक ड्रोन की रडार में आने वाले बदमाशों का अब बचकर निकलना मुश्किल है। राजस्थान पुलिस ने अपराधियों की जमीन सहित आसमान से भी निगरानी की तैयारी तेज कर दी है।हाइटेक ड्रोन से किसी भी एरिया में छिपे बदमाशों की निगरानी रखी जाएगी। ड्रोन से सायरन बजाने के साथ ही आंसू गैस छोड़ी जाएगी। एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) वीके सिंह ने बताया- राजस्थान पुलिस ने 17 पुलिस जवानों को इंडियन आर्मी से एंटी ड्रोन सिस्टम की ट्रेनिंग दिलवाई गई है, जिसे जल्द राजस्थान पुलिस के बेड़े में इसे शामिल कर लिया जाएगा। 15 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक ये ट्रेनिंग की गई। यह ट्रेनिंग सिर्फ हाइटेक ड्रोन उड़ाने तक सीमित नहीं थी,पुलिस जवानों को ऑपरेशन के दौरान ड्रोन खराब होने पर उसे तुरंत रिपेयर कर दोबारा यूज करना भी सिखाया गया था। ये ट्रेनिंग प्रोग्राम श्रीगंगानगर के लालगढ़ जाटान स्थित सप्तशक्ति ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल (SSDTS) में तीन सप्ताह चला था। इस पुलिस ड्रोन इंटीग्रेशन कोर्स में कॉन्स्टेबल से लेकर डीएसपी स्तर तक के अफसर शामिल हुए थे। राजस्थान पुलिस ने पहली बार इंडियन आर्मी के साथ मिलकर ट्रेनिंग की RPS प्रवीण कुमार ने बताया कि राजस्थान पुलिस ने पहली बार इंडियन आर्मी के साथ मिलकर ट्रेनिंग की हैं। ट्रेनिंग में मेन रुप से बोर्डर जिलों के पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया था। राजस्थान पुलिस अब ड्रोन का यूज एक-दो ऑपरेशन तक सीमित रखने के बजाय व्यवस्थित तरीके से पुलिसिंग में शामिल करने की तैयारी कर रही है। ट्रेनिंग में पुलिस जवानों को सर्विलांस ड्रोन ऑपरेशन, मिशन प्लानिंग, फ्लाइंग सेफ्टी और फर्स्ट पर्सन व्यू (FPV) ड्रोन सिमुलेशन की जानकारी दी गई। पुलिस जवान सिर्फ रिमोर्ट से ड्रोन उड़ाना नहीं सीख रहे, बल्कि ऑपरेशन से पहले उसकी प्लानिंग बनाने, उड़ान के दौरान परिस्थितियों के हिसाब से फैसले लेने और सुरक्षित तरीके से मिशन पूरा करने की क्षमता भी विकसित कर रहे हैं। ड्रोन का अब पुलिस सायरन बजाने और आंसू गैस के गोले छोड़ने तक में यूज करने वाली हैं। दिन-रात होगी आसमान से निगरानी राजस्थान पुलिस की ओर से हाईटेक ड्रोन की मदद से दिन-रात बदमाशों पर निगरानी रखेगी। पुलिस को अपराधियों का पीछा करने, संवेदनशील इलाकों की निगरानी या किसी बड़े ऑपरेशन में हर जगह पहुंचना मुश्किल होता है। ऐसे में हाईटेक ड्रोन की मदद से आसमान से निगरानी रखना आसान होगा। पुलिसकर्मियों से मिशन आधारित ड्रोन फ्लाइट्स कराई गई। जिससे जमीन से पुलिस की टीम ऑपरेशन संभालेगी और आसमान से ड्रोन पूरे इलाके पर नजर रखेगा। ट्रेनिंग में खराब ड्रोन को ठीक करने सहित कई जानकारी दी ड्रोन ऑपरेशन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी उसका रख-रखाव है। ड्रोन खराब होने पर पूरा ऑपरेशन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में पुलिसकर्मियों को ड्रोन की असेंबली, डिसअसेंबली, मेंटेनेंस खराब ड्रोन को कैसे ठीक करना है और ड्रोन में टेक्निकल प्रॉब्लम क्या आती है। इन सभी की अलग-अलग सेशन में जानकारी दी गई। ट्रेनिंग में बताया गया कि ड्रोन उड़ाना जितना आसान दिखाई देता है, उतना ही यह नियमों से जुड़ा काम है। ड्रोन रेगुलेशन और एयर स्पेस मैनेजमेंट की जानकारी होना भी जरूरी हैं। VVIP मूवमेंट में 200 मीटर आगे उड़ेगा ड्रोन राजस्थान पुलिस की ओर से अब VVIP सिक्योरिटी में भी ड्रोन का यूज किया जाएगा। VVIP मूवमेंट में 200 मीटर आगे ड्रोन को उड़ाया जाएगा। कुछ महीने पहले बागेश्वर धाम के महंत धीरेन्द्र शास्त्री के राजस्थान में मूवेंट के दौरान उनकी सिक्योरिटी में पुलिस ने ड्रोन का यूज किया था। जिस रूट पर धीरेन्द्र शास्त्री का मूवमेंट था, उस रूट पर ड्रोन को उड़ाया गया था। एंटी ड्रोन सिस्टम पर काम शुरू राजस्थान पुलिस ने आर्मी से एंटी ड्रोन सिस्टम की ट्रेनिंग ले ली है, जिसे जल्द राजस्थान पुलिस के बेड़े में इसे शामिल कर लिया जाएगा। एंटी ड्रोन सिस्टम में पहले सामने से आ रहे ड्रोन का डिटेक्शन किया जाता है, जिसके बाद उसे जैमर से अनकंट्रोल किया जाता है। अगर ड्रोन आगे बढ़ रहा है तो उसे न्यूट्रलाइज किया जाता हैं। ट्रेनिंग के दौरान पुलिस विभाग के दो अधिकारियों को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA)का रिमोर्ट पायलेट सर्टिफिकेट (RPC)भी मिला। इससे स्पष्ट होता है कि राजस्थान पुलिस के पास जो ड्रोन पायलेट है, वह ड्रोन का यूज आने वाली जरूरत के हिसाब से कर करे हैं। ड्रोन ट्रेनिंग से आगे क्या बदलेगा? ड्रोन रोडमैप को मंजूरी मिलने पर इसे जिलों तक लागू किया जाता है, तो पुलिस के पास किसी घटना को लेकर जमीन के साथ हवाई निगरानी का विकल्प भी मौजूद होगा। बड़े क्षेत्र में एक साथ निगरानी या किसी ऑपरेशन में टीम को रियल टाइम जानकारी के लिए ड्रोन पुलिस की आंख और कान बन सकता है। डीजीपी (राजस्थान) राजीव कुमार शर्मा का कहना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से राजस्थान पुलिस की कार्यक्षमता को लगातार मजबूत किया जा रहा है। ड्रोन आज निगरानी, सुरक्षा और पुलिस ऑपरेशन्स में उपयोगी तकनीकी संसाधन के रूप में उभर रहा है।
