पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति (फूड सप्लाई) विभाग के एक इंस्पेक्टर और एक जूनियर ऑडिटर को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान भोगपुर में तैनात इंस्पेक्टर रजनीश रामपाल और जालंधर जिला नियंत्रक कार्यालय में कार्यरत जूनियर ऑडिटर मानव भनोट के रूप में हुई है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन पोर्टल पर दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद की गई। शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को बताया था कि खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान कस्टम मिलिंग के लिए उनके शैलर को धान आवंटित किया गया था। इस धान के भंडारण (स्टोरेज) के काम को पूरा करने और मंजूरी देने के बदले में इन अधिकारियों द्वारा मोटी रकम की मांग की जा रही थी। शिकायत के साथ ही पीड़ित ने विजिलेंस को पुख्ता सबूत भी सौंपे थे। दो किश्तों में लिए 1.20 लाख रुपये, दूसरे अधिकारियों के नाम का भी इस्तेमाल विजिलेंस की जांच में सामने आया कि कुल 1.20 लाख रुपये की रिश्वत का लेन-देन हुआ था। इंस्पेक्टर रजनीश रामपाल ने धान भंडारण का काम करवाने के लिए पहली किश्त के रूप में 50,000 रुपये लिए। इसके बाद, उन्होंने एएफएसओ (AFSO) गुरविंदर सिंह के नाम पर 20,000 रुपये की दूसरी किश्त भी वसूली। जूनियर ऑडिटर मानव भनोट पर आरोप है कि उसने अपने लिए और जिला नियंत्रक कार्यालय के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी के नाम पर 50,000 रुपये की रिश्वत ली। वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर केस दर्ज, अन्य कर्मियों पर भी गाज गिरने की आशंका शिकायतकर्ता द्वारा रिश्वत के लेन-देन के दौरान बनाई गई वीडियो रिकॉर्डिंग को विजिलेंस ने सबसे बड़ा आधार बनाया। सबूत सही पाए जाने पर विजिलेंस थाना जालंधर में दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट) के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में नामजद किए गए अन्य अधिकारियों और दफ्तर के कर्मचारियों की भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है, जिससे कुछ और गिरफ्तारियां संभव हैं।

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