यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल चित्तौड़गढ़ दुर्ग में सालों से चल रहे अतिक्रमण और अवैध निर्माण एक बार फिर चर्चा में हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने दुर्ग क्षेत्र में 209 से ज्यादा रेजिडेंशियल और कमर्शियल अतिक्रमण चिन्हित किए हैं। इनमें बड़ी संख्या में कच्चे निर्माणों के साथ होटल, रेस्टोरेंट और अन्य पक्के कमर्शियल निर्माण भी शामिल हैं। अब जिला प्रशासन ने साल 2020 के बाद बने निर्माणों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने स्पष्ट किया है कि दुर्ग क्षेत्र में जारी निर्माण कामों को तुरंत प्रभाव से रोकने, एफआईआर दर्ज कराने और नियमानुसार अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पुरातत्व विभाग को पहले जारी नोटिसों पर सख्ती से फॉलोअप करने को कहा गया है। कलेक्टर बोलीं- निर्माण रोकने और एफआईआर के दिए निर्देश जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने कहा कि चित्तौड़गढ़ दुर्ग यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट है और यहां हो रहे अतिक्रमणों को लेकर प्रशासन गंभीर है। उन्होंने बताया कि आर्कियोलॉजी विभाग की ओर से जिन मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें आगे की कार्रवाई के लिए निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी मामले में डेमोलिशन आदेश जारी नहीं हुए हैं तो उनका भी सख्ती से फॉलोअप करने को कहा गया है। कलेक्टर ने बताया कि जो निर्माण अभी प्रक्रियाधीन हैं या वर्तमान में किए जा रहे हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने और अतिक्रमणों को नियमानुसार हटाने के लिए भी कहा गया है। उन्होंने बताया कि साल 2020 के बाद बने निर्माणों में करीब सात से आठ ऐसे कमर्शियल अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं, जिनका राजस्व विभाग की टीम ने भी सत्यापन किया है। साल 2024 में ऐसे मामलों में ASI ने 67 नोटिस जारी किए गए थे। उन्होंने बताया कि जो बन चुके है उनके डेमोलिशन के लिए दिल्ली ASI के आदेश के बाद ही कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में काफी समय भी लगता है। दुर्ग क्षेत्र में होटल, रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण शामिल एएसआई के संरक्षण सहायक प्रेमचंद शर्मा ने बताया कि दुर्ग की प्राचीर के भीतर का पूरा क्षेत्र प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के तहत संरक्षित है। यहां केंद्र सरकार की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण, पुनर्निर्माण, मरम्मत या अतिक्रमण करना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद विभाग ने 209 से अधिक अतिक्रमण और अवैध निर्माण चिन्हित किए हैं। इनमें 200 से अधिक कच्चे अतिक्रमण और मरम्मत काम शामिल हैं, जबकि होटल, रेस्टोरेंट और हैंडीक्राफ्ट से जुड़े भवन पक्के अवैध निर्माण की श्रेणी में आते हैं। विभाग की ओर से सभी संबंधित लोगों को नामजद किया जा चुका है और नोटिस भी जारी किए गए हैं। हालात ऐसे हैं कि दुर्ग क्षेत्र में बने कुछ ऊंचे निर्माण अब शहर से भी साफ दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने बताया कि यहां किसी के पास पट्टा नहीं है और ना ही रजिस्ट्री हो सकती है। ऐसे में सभी को अवैध ही माना जाता है। ASI की और से रिपेयरिंग करवाने का प्रावधान है लेकिन उसके लिए भी डॉक्यूमेंट्स का होना जरूरी है। डेमोलिशन के लिए जोधपुर और दिल्ली भेजी गई फाइल पुरातत्व विभाग ने कुछ मामलों में नोटिस चस्पा कर संबंधित लोगों को खुद निर्माण हटाने की चेतावनी दी है। विभाग का कहना है कि निर्धारित समय में निर्माण नहीं हटाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में डेमोलिशन का खर्च भी संबंधित व्यक्ति से वसूला जा सकता है और एक लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा दो साल की सजा भी हो सकती है। एएसआई के अनुसार डेमोलिशन से संबंधित फाइल जोधपुर क्षेत्रीय कार्यालय और दिल्ली स्थित केंद्रीय मुख्यालय को भेजी गई है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।