परंपरागत खेती छोड़कर एक युवा किसान ने बागवानी में हाथ आजमाए और कुछ महीनों में ही कमाई का नया मॉडल डेवलप कर लिया। किसान ने इसकी शुरुआत दोस्त के अनार के बगीचे से प्रेरणा लेकर की। उसने पहले पांच महीने तक अलग-अलग पौधों पर प्रयोग किए।क्लाइमेट में सेट होने वाली पपीते की वैरायटी चुनकर 8 बीघा में बाग लगा दिया। सात महीने में फ्रूटिंग होने लगी। ऑर्गेनिक पपीते की इतनी मांग हुई कि व्यापारी सीधे खेत पर पहुंचने लगे। इस सीजन उसकी कमाई 35 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। मुनाफे का यह मॉडल देखने और समझने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में किसान उनके खेत पर पहुंच रहे हैं। म्हारे देश की खेती में इस बार कहानी नागौर के किसान की… परंपरागत खेती से आगे बढ़ने का फैसला सुरेश घोला ने बताया- 12वीं पास करने के बाद रियाबड़ी में खाद-बीज के बिजनेस में उतर गया। बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए एग्रीकल्चर में BSc की। आज अजमेर, पाली और नागौर में चार बड़ी शॉप हैं। नौकरी करने के बजाय आज बिजनेस से 20 लोगों को रोजगार दे रहा हूं। पांच भाइयों के बंटवारे में पिता के पास पुश्तैनी 15 बीघा जमीन हिस्से में आई थी। धीरे-धीरे 115 बीघा जमीन कर ली। खेती की 60 बीघा जमीन है, लेकिन सालों से बरसाती फसल ही कर रहा था। साल 2024 जनवरी में जयपुर घूमने के दौरान दोस्त के घर गया। वहां अनार का बगीचा देखा था। तब मन बनाया कि बागवानी में कुछ करना चाहिए। इंटरनेट पर काफी सर्च करने के बाद पपीते के तीन तरह के पौधे सेलेक्ट किए। अक्टूबर 2024 में तीन वैरायटी के 3300 पौधे 8 बीघा में लगाए। पांच महीने तक खेत में प्रयोग किए। खाद, पानी, क्लाइमेट, रोग आदि सभी तथ्यों पर बारीकी से काम किया। 3300 में से केवल करीब 300 पौधे ही बच पाए थे। नासिक से मंगवाए पपीते के 2500 पौधे किसान सुरेश ने बताया- पांच महीने प्रयोग के बाद रेड लेडी 786 ताइवान वैरायटी को चुना। महाराष्ट्र के नासिक से 40 रुपए प्रति पौधे के हिसाब से करीब 2500 पौधे मंगवाए। मार्च 2025 में 8 बीघा जमीन में इन पौधों की रोपाई की। एक बीघा जमीन में करीब 250 पौधे लगाए गए। इसके अलावा खेत में विविधता के लिए उन्होंने 200 आंवला (चकिया नमक वैरायटी), 50 अमरूद और 140 सेब (हरमन-99) के पौधे भी लगाए हैं। सेब के पौधों की अभी शुरुआती ग्रोथ चल रही है। सात महीने में शुरू हो गया उत्पादन सुरेश बताते हैं कि पपीते के पौधे लगाने के करीब सात महीने बाद अक्टूबर 2025 से फल आना शुरू हो गया। एक पौधे से औसतन 70 से 100 किलो तक उत्पादन मिल रहा है। वर्तमान में खेत से रोजाना 200 से 500 किलो तक पपीते की तुड़ाई हो रही है। पपीता 50 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खेत से ही बिक रहा है। मंडी जाने की जरूरत नहीं, खेत से ही बिक्री पपीता पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से उगाया जा रहा है। इसलिए लोग एडवांस बुकिंग करवाकर फल खरीदने आते हैं। अच्छी गुणवत्ता और ऑर्गेनिक उत्पादन के कारण व्यापारी और ग्राहक सीधे खेत पर पहुंच जाते हैं। इससे मंडी तक फल ले जाने का खर्च और समय बच जाता है। वर्तमान में पपीते की तुड़ाई के लिए खेत पर कई मजदूर काम कर रहे हैं। सुरेश बताते हैं कि पपीते की खेती में रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग नहीं करते। इसलिए जैविक घोल का ड्रिप सिंचाई और बारिश के पानी का उपयोग सुरेश बताते हैं कि बागवानी में कम पानी और अधिक पानी दोनों ही नुकसानदायक होते हैं। सिंचाई के लिए खेत में ड्रिप सिस्टम लगाया गया है, जिससे हर पौधे की जड़ तक सीधे पानी पहुंचता है। एक पौधे को करीब 3 से 4 लीटर पानी की जरूरत होती है। सुरेश ने खेत में वर्षा जल संग्रहण के लिए एक छोटा डेम भी बनाया है, जिससे बारिश का पानी जमा हो जाता है। इसके अलावा 2 एचपी का ट्यूबवेल भी लगाया है, जिससे रोज करीब 3000 लीटर पानी मिलता है। इस व्यवस्था से सिंचाई का काम आसानी से हो जाता है। पपीते की खेती के लिए जरूरी जानकारी सुरेश के अनुसार पपीते की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट या काली दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच स्तर 5.5 से 7.0 के बीच होना चाहिए। पौधों की रोपाई फरवरी-मार्च या जुलाई-सितंबर में की जा सकती है। रोपण के लिए 60×60×60 सेंटीमीटर के गड्ढे तैयार कर उनमें सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और नीम की खली मिलाकर पौधे लगाए जाते हैं। पौधे लगाने के बाद नियमित देखभाल और ड्रिप सिंचाई से अच्छी पैदावार मिलती है। अब खुद तैयार कर रहे पौधे पपीते की खेती में सफलता मिलने के बाद सुरेश अब खुद की नर्सरी तैयार करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2026 में सेंसड़ा गांव में ‘श्री वीर तेजा नर्सरी’ शुरू की है, जिसमें अच्छी वैरायटी के पौधे तैयार किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को आसानी से पौधे उपलब्ध हो सकें। — खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… अफसर बनने का सपना टूटा, अब वकालत के साथ खेती:चार तरह के गेहूं, 7 रंग की गोभी उगा रहे; सालाना 15 लाख का प्रॉफिट RAS अधिकारी बनने का सपना था। इंटरव्यू तक भी पहुंचे। सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का रिटन क्लियर हो गया था, लेकिन फिजिकल के दिन हुए हादसे के कारण सरकारी नौकरी का सपना अधूरा रह गया। पूरी खबर पढ़ें

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