जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में एक प्रसूता को गलत ब्लड चढ़ाने का मामला सामने आया है। जोधपुर जिले के डावरा बावड़ी निवासी धापू भील (24) को सामान्य प्रसव के बाद एनीमिया व अन्य कारणों से उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया था। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि प्रसूता और एक और महिला जिसका ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था, उन दोनों का नाम एक था। इन दोनों के पति का नाम भी एक जैसा होने की वजह से ये लापरवाही हुई है।
इधर, इस पूरे मामले में उम्मेद हॉस्पिटल प्रशासन बोलने से इनकार कर रहा है। 11 जुलाई को ओ पॉजिटिव ब्लड चढ़ाया था प्रसूता की सास पप्पू देवी ने बताया कि 11 की सुबह 8 बजे नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। इसके बाद खून की कमी की वजह से सुबह 11 बजे उम्मेद हॉस्पिटल रेफर किया गया था। 11 जुलाई को ओ पॉजिटिव ब्लड चढ़ाया गया था। इसके बाद 12 जुलाई की रात दोबारा जो ब्लड चढ़ाया वो गलत था। ब्लड चढ़ाते ही धापू को कंपकपी छूटने लगी। इसके साथ की यूरिन के लिए लगाई थैली में ब्लड आने लगा था। 13 जुलाई को उसे महात्मा गांधी हॉस्पिटल रेफर किया गया। गलत ब्लड चढ़ाते ही तबीयत खराब हो गई प्रसूता के पति किशनाराम ने बताया कि पहली बार जब ब्लड चढ़ाया तो तबीयत सही थी। दूसरी बार गलत ब्लड चढ़ाते ही तबीयत खराब हो गई। उन्होंने बताया कि परिवार को हॉस्पिटल मैनेजमेंट की और से नहीं बताया गया था कि गलत खून चढ़ाने की वजह से महात्मा गांधी हॉस्पिटल रेफर किया जा रहा है। अभी प्रसूता एमजीएच के आईसीयू वार्ड में एडमिट है। एमजीएच हॉस्पिटल में करवाया एडमिट गलत ब्लड चढ़ाने के बाद धापू भील की हालत बिगड़ने पर उसे गुरुवार रात महात्मा गांधी हॉस्पिटल (एमजीएच) रेफर किया गया, जहां उनका आईसीयू में उपचार चल रहा है। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा ने कहा कि मामले की जानकारी मिली है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 11 जुलाई को बेटे को दिया था जन्म परिजनों ने बताया कि 11 जुलाई को बावड़ी में धापू ने पुत्र को जन्म दिया था। खून की कमी बताकर उन्हें उम्मेद अस्पताल भेजा गया। उपचार के दौरान ब्लड चढ़ाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों के इसके बाद उनका पेशाब बंद हो गया और रक्तस्राव शुरू हो गया। उनका कहना है कि उन्हें अब तक पूरी जानकारी नहीं दी गई कि उनकी हालत बिगड़ने का कारण क्या था। यूरिन आना बंद हो गया था महात्मा गांधी हॉस्पिटल के सुप्रीडेंट फतेह सिंह ने बताया कि गलत ब्लड की वजह से यूरीन आना बंद हो गया था और उसकी किडनी पर इफेक्ट हुआ। महिला का लगातार डायलिसिस चल रहा है और हालत में सुधार है। एम्स में ऐसे ही केस में मौत हो चुकी शहर के अस्पतालों में गलत खून चढ़ाने का यह एक साल में तीसरा मामला है। पिछले वर्ष अक्टूबर में जोधपुर एम्स में मांगीलाल बिश्नोई (50) को कथित रूप से बिना आवश्यकता रक्त चढ़ा दिया गया था, जिनकी बाद में मृत्यु हो गई। नवंबर में एमजीएच के कॉटेज वार्ड में बी पॉजिटिव रक्त ए पॉजिटिव ग्रुप के एक बास्केटबॉल खिलाड़ी को चढ़ा दिया गया था। मरीज के आपत्ति जताने पर रक्त चढ़ाना तुरंत रोक दिया गया था। अब इसी तरह का मामला उम्मेद अस्पताल में सामने आया है।