कोटा में इस बार गर्मी जमकर तेवर दिखा रही है। दोपहर में सड़क पर आसमान से आग बरसने जैसा अहसास हो रहा है। शहर में रविवार दोपहर एक बजे निजी वेदर कंपनियों के अनुसार तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सुबह 10 बजे बाद ही धूप इतनी तेज हो रही है कि सड़कों पर आवाजाही कम नजर आने लगी है। दोपहर के समय बाजारों और मुख्य मार्गों पर सामान्य दिनों की तुलना में काफी सन्नाटा दिखाई दे रहा है। पिछले एक सप्ताह से कोटा का अधिकतम तापमान लगातार 41 से 44 डिग्री के बीच बना हुआ है। शनिवार को अधिकतम तापमान 42.7 डिग्री दर्ज किया गया था, जबकि न्यूनतम तापमान भी बढ़कर 30 डिग्री तक पहुंच गया। यही वजह है कि अब रात में भी लोगों को राहत नहीं मिल रही। मकानों की दीवारें देर रात तक गर्म बनी रहती हैं और कूलर-एसी भी पूरी राहत नहीं दे पा रहे। रात में भी नहीं मिल रही राहत
आमतौर पर मई के शुरुआती दिनों में रात का तापमान 25 से 28 डिग्री के बीच रहता था, लेकिन इस बार पहली बार न्यूनतम तापमान 30 डिग्री तक पहुंचने से गर्म रातों का दौर शुरू हो गया है। शहर के कई इलाकों में लोग देर रात तक घरों की छतों और गलियों में टहलते नजर आए। दोपहर के समय हालात ऐसे हैं कि राहगीर जहां भी छांव दिखती है, वहीं कुछ देर रुककर राहत लेने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। बस स्टैंड, चौराहों और बाजारों में लोग सिर और चेहरा कपड़ों से ढककर निकल रहे हैं। तेज धूप के साथ हवा बंद होने से उमस भी बढ़ गई है, जिससे शरीर पर गर्मी का असर और ज्यादा महसूस हो रहा है। गौशालाओं में गायों पर पानी की बौछारें
भीषण गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, पशुओं पर भी दिखाई देने लगा है। शहर और आसपास की कई गौशालाओं में गायों को गर्मी से बचाने के लिए दिन में कई बार पानी की बौछारें की जा रही हैं। पशुपालक टीनशेड के नीचे कूलर और पंखों की व्यवस्था भी कर रहे हैं ताकि मवेशियों को लू से बचाया जा सके। डॉक्टरों की सलाह
वहीं डॉक्टर्स ने लोगों को दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक अनावश्यक बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। लगातार पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। अस्पतालों में भी डिहाइड्रेशन, उल्टी और चक्कर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है।