सीकर में 21 साल के राहुल कुमार की कांवड़ यात्रा चर्चा में है। राहुल कांवड़ के एक पलड़े में अपनी दादी लच्छी देवी को बैठाकर यात्रा कर रहे हैं। जो शेखावाटी के मिनी हरिद्वार तीर्थराज लोहार्गल के गौमुख से जल भरकर 45 किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं। राहुल ने बताया- 20 अगस्त को दोपहर 2 बजे कांवड़ में एक तरफ दादी और दूसरी तरफ जल भरकर रवाना हुए। पहले दिन रात को रामपुरा और दूसरे दिन पिपराली में आराम किया। अब तीसरा सीकर में रहेगा। चौथे दिन 23 अगस्त को शाम 7 बजे तक गांव रामपुरा पहुंचने की उम्मीद है। राहुल ने बताया- कांवड़ के दोनों पलड़ों का कुल वजन करीब 81 किलो है। एक पलड़े में 42 किलो जल से भरी लोहे की मटकियां रखी हैं। वहीं, दूसरे पलड़े में दादी के चौकी पर बैठी हैं। 20 तारीख को कार से लोहार्गल पहुंचा। पहले सोचा था लोहार्गल से एक-एक क्विंटल जल लेकर आएंगे। फिर श्रवण कुमार का एक भजन सुना। मैंने सोचा कि आज के युग में भी सतयुग होना जरूरी है। कांवड़ जल तो हर कोई लाता है। कांवड़ ऐसी लानी चाहिए कि दुनिया में मिसाल बने। इस लिए मैं लोहार्गल से दादी को कांवड़ में बैठाकर ला रहा हूं। इसमें परिवार के लोग भी साथ हैं। परिवार भी साथ राहुल ने बताया- कांवड़ के मुख्य बांस के चारों तरफ फॉम लपेटा गया है। मजबूत रस्सियों से बांधकर भगवान भोलेनाथ का नाम लेकर आगे बढ़ रहे हैं। हर 100 मीटर के बाद हल्का आराम लेकर फिर आगे का सफर तय करते हैं। राहुल के साथ साथी बनवारी लाल बरवड़, रोहित शर्मा समेत परिवार के इंद्रपाल शेषमल और मनोज बरवड़ भी सहयोग कर रहे हैं। दादी बोली- श्मशान जाने का टाइम है, बच्चों ने तीर्थयात्रा करवा दी दादी लच्छी देवी ने कहा- घर के बच्चे ऐसे हैं, जो तीर्थ करवा रहे हैं। मेरा कुछ नहीं है, सिर्फ बैठी हूं। सारी मेहनत ये बच्चे कर रहे हैं। भगवान सबको ऐसे नाती-पोते दे। अब तो श्मशान जाने का टाइम है, लेकिन बच्चों ने तीर्थयात्रा करवा दी। पहले भी ला चुके जल बता दें कि राहुल बिजली के तार बिछाने का काम करता है। राहुल पहले भी 2 बार तीर्थराज लोहार्गल से 51 लीटर जल की कावड़ गांव रामपुरा ले जा चुके हैं।
