चित्तौड़गढ़ में सकल दिगंबर जैन समाज और मुनि सेवा समिति के तत्वावधान में मंगलवार को आचार्य श्री 108 पुलक सागर जी महाराज का भव्य नगर प्रवेश हुआ। कलेक्ट्री रोड, एसबीआई बैंक, सीकेएसबी और मांगलिक धाम सहित कई जगह लोगों ने आचार्य श्री का फूल बरसाकर स्वागत किया। अहिंसा सर्कल से शुरू हुए इस नगर प्रवेश के दौरान हजारों श्रद्धालु सड़क पर मौजूद रहे। भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सुबह से ही शहर में धार्मिक माहौल देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया आयोजन में सिर्फ चित्तौड़गढ़ ही नहीं, बल्कि भीलवाड़ा और आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे और श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया। इस दौरान सकल दिगंबर जैन समाज के लोगों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और पारंपरिक वेशभूषा में नगर प्रवेश में शामिल हुए। पूरे शहर में दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा और हर तरफ जयकारे सुनाई देते रहे। ज्ञान गंगा महोत्सव की शुरुआत नगर प्रवेश के बाद ज्ञान गंगा महोत्सव की शुरुआत हुई। मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष मनोज कुमार पाटनी और महामंत्री नवीन कुमार पाटनी ने आचार्य श्री का स्वागत कर धर्मसभा में विराजमान होने का आग्रह किया। इसके बाद आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान महावीर बेद, ज्ञान सागर, राजकुमार गदिया, महावीर रमावत और उमेदमल गंगवाल परिवार ने चरण धोकर स्वागत किया। वहीं सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष पारस सोनी ने आचार्य श्री को शास्त्र भेंट कर आशीर्वाद लिया। आयोजन को व्यवस्थित बनाने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से भी पर्याप्त व्यवस्था की गई थी।बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बच्चे धर्मसभा में मौजूद रहे और सभी ने आचार्य श्री के प्रवचन सुने। स्वाभिमान का दिया संदेश अपने प्रवचन में आचार्य श्री 108 पुलक सागर जी महाराज ने कहा- चित्तौड़गढ़ सिर्फ एक शहर या किला नहीं है, बल्कि यह शौर्य, स्वाभिमान, त्याग और बलिदान की पहचान है। उन्होंने कहा- इस धरती का इतिहास आज भी पूरे देश को प्रेरणा देता है। यहां की मिट्टी में वीरता की मिसाल छिपी हुई है और यही वजह है कि चित्तौड़गढ़ का नाम पूरे देश में सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा- अपने इतिहास और संस्कारों को कभी नहीं भूलना चाहिए। अच्छे विचारों के साथ जीना सबसे बड़ी साधना परिवार और समाज में अच्छे विचारों के साथ जीवन जीना ही सबसे बड़ी साधना है। उन्होंने युवाओं से भी अपने संस्कारों को मजबूत रखने और जीवन में ईमानदारी, अनुशासन तथा स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ने की बात कही। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया।
