सिंगला-रूपनगढ़ सिंचाई परियोजना के विरोध में चार गांवों के पीड़ित किसानों ने बुधवार को अजमेर में प्रदर्शन किया। किसान संघर्ष समिति के बैनर तले करीब 100 ट्रैक्टरों का काफिला रूपनगढ़ से 52 किलोमीटर का सफर तय कर अजमेर पहुंचे। मांगे नहीं मानने पर आमरण अनशन की चेतावनी प्रशासन ने ट्रैक्टरों को रोकने के लिए कलेक्ट्रेट से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले शास्त्री नगर पुलिस चौकी के पास क्रेन, डंपर और बैरिकेड्स लगाकर रास्ता बंद कर दिया। इससे किसान भड़क गए और सड़क पर ही धरना देकर बैठ गए। इस दौरान 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात रहे। किसान मौके पर जिला कलेक्टर को बुलाने की मांग पर अड़ गए। प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए कलेक्ट्रेट ले जाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने पीछे रोके गए किसानों को भी कलेक्ट्रेट बुलाने की मांग रखी। काफी गहमा-गहमी और समझाइश के बाद किसानों को पैदल कलेक्ट्रेट जाने की अनुमति मिली। इसके बाद किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर घेराव किया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि समय रहते उनकी न्यायसंगत मांगें नहीं मानी गईं तो वे आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे। 32 साल पुराने अवॉर्ड को रद्द करने की मांग ज्ञापन में किसानों ने 8 जुलाई 1994 के अवॉर्ड को रद्द करने की मांग की। किसानों का कहना है कि सिंगला बांध बनने के बाद से आज तक उसमें पानी की एक बूंद भी नहीं आई है। ऐसे में बिना उपयोगिता वाले बांध के लिए हजारों बीघा उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण पूरी तरह औचित्यहीन है। किसानों के मुताबिक सिंगला, सिंगारा, थल, नोन्दपुरा और श्रीनिंबार्कतीर्थ के करीब 1000 से 1500 परिवारों की 2500 से 3000 बीघा जमीन प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि इसकी जानकारी उन्हें जून 2026 में दी गई। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 32 सालों से जमीनों पर नामांतरण, केसीसी और क्रय-विक्रय का काम बिना किसी बाधा के हो रहा था, लेकिन अब तहसील प्रशासन ने इन राजस्व कार्यों को अचानक रोक दिया है। रामपाल जाट बोले- राजनीति की जूतियां बाहर उतारकर आएं किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने आंदोलन को गैर-राजनीतिक रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे मंदिर या मस्जिद में जाते समय जूते-चप्पल बाहर उतारकर जाते हैं, वैसे ही नेताओं को भी अपनी राजनीति रूपी जूतियां बाहर छोड़कर किसान आंदोलन में आना होगा। उन्होंने कहा कि नेता राजनीति छोड़कर किसानों के साथ आएंगे तो किसान एकजुट रहेंगे और बंटेंगे नहीं। जब तक लड़ाई सिर्फ किसान के अधिकारों पर केंद्रित रहेगी, तभी किसान जीतेंगे। प्रदर्शन में किसान महापंचायत अध्यक्ष रामपाल जाट के साथ पूर्व मंत्री नसीम अख्तर भी शामिल हुईं।
