अजमेर के जेएलएन अस्पताल में डिलीवरी के बाद 24 साल की महिला की मौत हो गई। इसके बाद मंगलवार को अस्पताल की मोर्चरी के बाहर जमकर हंगामा हुआ। शव रखे जाने के बाद ससुराल और पीहर पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। करीब 3 से 4 घंटे दोनों पक्षों के बीच 2-3 बार हाथापाई की नौबत आ गई। मौके पर मौजूद रिश्तेदारों ने बीच-बचाव कर कई बार मामला शांत कराया। इस दौरान दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे और कार्रवाई की मांग करते रहे। दरअसल, मृतका प्रीति राव (24) की शादी नवंबर 2024 में ब्यावर निवासी सुनील राव (30) से हुई थी। सुनील के अनुसार प्रीति प्रेग्नेंट थी। कुछ दिन पहले प्रसव पीड़ा होने पर उसे ब्यावर के अमृत कौर अस्पताल ले जाया गया था। हालत गंभीर होने पर उसे अजमेर के जनाना अस्पताल रेफर किया गया। ऑपरेशन से बेटे को दिया जन्म, रात में बिगड़ी तबीयत मृतका के पति सुनील ने बताया- 10 अगस्त को दोपहर करीब 4 बजे प्रीति की ऑपरेशन से डिलीवरी हुई। उसने बेटे को जन्म दिया। ऑपरेशन के दौरान प्रीति को कई बार पैनिक अटैक आया। देर रात उसकी तबीयत दोबारा बिगड़ी तो जेएलएन अस्पताल शिफ्ट किया गया। मंगलवार सुबह करीब 9 बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सुनील का कहना है कि डॉक्टरों ने दोबारा पैनिक अटैक आने की बात बताई है। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। वहीं, सुनील ने पीहर पक्ष की ओर से लगाए जा रहे लापरवाही के आरोपों को गलत बताया। पीहर पक्ष बोला- तबीयत बिगड़ने से लेकर वेंटिलेटर तक की जानकारी नहीं दी प्रीति के भाई सूर्य प्रकाश (27) ने आरोप लगाया कि प्रीति की तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी पीहर पक्ष को समय पर नहीं दी गई। डिलीवरी के बाद प्रीति को वेंटिलेटर पर रखे जाने की जानकारी भी उन्हें नहीं दी गई। भाई का आरोप है कि ससुराल पक्ष की लापरवाही के कारण बहन की मौत हुई। प्रीति की बहन सोनू ने बताया- सोमवार सुबह प्रीति ने अस्पताल से फोन कर बुलाया था। वह मसूदा स्थित अपने ससुराल से अस्पताल पहुंची, लेकिन आरोप है कि ससुराल वालों ने उसे प्रीति से मिलने नहीं दिया। सोनू का कहना है कि उसे लगातार मिलने से रोका और धमकाया गया। उसने भी प्रीति की मौत के लिए पति और ससुराल पक्ष की लापरवाही को जिम्मेदार बताया। मोर्चरी के बाहर रोते रहे परिजन, आरोप-प्रत्यारोप के बीच कई बार हाथापाई प्रीति की मौत के बाद शव को जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। शव देखने के बाद पीहर पक्ष के परिजन रोने लगे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और 3-4 घंटे के दौरान कई बार दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। दो से तीन बार हाथापाई की स्थिति बनी। मौके पर मौजूद अन्य रिश्तेदारों ने दोनों पक्षों को अलग कर मामला शांत कराया। कुछ देर बाद फिर से दोनों पक्षों में बहस शुरू हो जाती। इस दौरान पीहर पक्ष कार्रवाई की मांग करता रहा, जबकि बीच में समझौते को लेकर भी बातचीत होती रही। कौन से थाने में मामला दर्ज होगा, इसे लेकर उलझन अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पादूकलां थाना पुलिस मोर्चरी पहुंची। बाद में पति के दस्तावेज और घटनाक्रम सामने आने के बाद मामला किस थाना क्षेत्र का है, इसे लेकर असमंजस पैदा हो गया। कभी ब्यावर, कभी पीसांगन तो कभी पादूकलां थाना क्षेत्र की बात सामने आती रही। मोर्चरी के बाहर विवाद और हाथापाई के बावजूद संबंधित थाना पुलिस के पहुंचने को लेकर भी परिजन सवाल उठाते रहे। अस्पताल चौकी प्रभारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाकर लौट गए, लेकिन उनके जाने के बाद दोनों पक्ष फिर आपस में उलझ गए। फिलहाल प्रीति का शव जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ है। बुधवार को थाना क्षेत्र स्पष्ट होने के बाद पोस्टमार्टम और आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति साफ होने की संभावना है। मंगलवार शाम तक किसी भी पक्ष की ओर से संबंधित थाने में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। जनाना अधीक्षक बोली- यह मेरा सरकारी फोन नहीं मामले में जनाना अधीक्षक से बात कि तो डॉ पूर्णिमा पचौरी ने कहा कि आपको क्या काम है? यह मेरा पर्सनल फोन है मैं किसी का फोन नहीं उठाती… सरकारी फोन नहीं है और फोन काट दिया। वहीं, जेएलएन अस्पताल के डॉक्टर राजेश जैन ने कहा- पेशंट सीरियस होकर आया था। पहले से ही सीपीआर दिया जा चुका था। वेंटिलेटर पर रखकर काफी कोशिश की लेकिन सुबह डेथ हो गई। तबियत क्यों बिगड़ी इसकी जनाना अस्पताल प्रशासन बता पाएंगे या पोस्टमार्टम से ही क्लियर हो पाएगा।
