ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती परीक्षा में झुंझुनूं जिले के चिड़ावा कस्बे के प्रख्यात कलाकार और लोक नाट्य शैली ‘ख्याल’ के प्रवर्तक नानूराम राणा से संबंधित सवाल पूछा गया हैं। दरअसल, पेपर में पूछा गया कि चिड़ावा के नानू राम किसके प्रमुख कलाकार है? इसके बाद झुंझुनूं की संस्कृति से परिचित लोगों ने बताया कि चिड़ावा निवासी नानूराम राणा को राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र की प्रसिद्ध लोक नाट्य शैली ‘शेखावाटी ख्याल’ का प्रवर्तक (संस्थापक) माना जाता हैं। उनके जन्म और कला की शुरुआत के साथ ही इस लोक नाट्य का एक नया युग शुरू हुआ, जिसे अक्सर शेखावाटी ख्याल का स्वर्ण युग भी कहा जाता है। नानूराम राणा केवल एक कलाकार नहीं थे, बल्कि वे एक साथ कई विधाओं में निपुण थे। उन्हें एक कुशल संगीतज्ञ, अभिनेता, नर्तक, गायक और सबसे बढ़कर, अनेक ख्यालों के रचनाकार के रूप में जाना जाता है। ख्यालों का सृजन: उन्होंने अनेक प्रसिद्ध ख्यालों की रचना की, जिनमें हीर रांझा, हरीचन्द, भर्तृहरि, जयदेव कलाली, ढोला मरवण और आल्हादेव प्रमुख हैं। ये ख्याल आज भी शेखावाटी क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय हैं और यहां की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग हैं। नानूराम की कला को उनके शिष्य दुलिया राणा (वजीरा) ने आगे बढ़ाया, जिनके ख्याल भी काफी पॉपुलर है। गुरु-शिष्य की इस परंपरा ने शेखावाटी ख्याल को पूरे राजस्थान में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। यह है शेखावाटी (चिड़ावा) ख्याल शेखावाटी ख्याल एक गेय लोक नाट्य शैली है, जिसका इतिहास लगभग 200 वर्ष पुराना है। इसे अक्सर इसके प्रवर्तक के नाम पर ‘चिड़ावा ख्याल’ भी कहा जाता है। इस ख्याल में किसी लोक प्रसिद्ध चरित्र की जीवन गाथा को गीतों और संवादों के माध्यम से मंचित किया जाता है। गीतमय संवादों के बीच-बीच में गद्य (बोलचाल की भाषा) का प्रयोग भी किया जाता है, जो इसे दर्शकों के लिए और अधिक बोधगम्य बनाता है।