राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में महिला खिलाड़ियों के सिलेक्शन को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। विमेंस अंडर-23 और अंडर-19 टीम के चयन पर कई खिलाड़ियों ने सिलेक्शन कमेटी पर पक्षपात और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि जिनका प्रदर्शन कमजोर रहा है, उन्हें टीम में शामिल किया गया है, जबकि निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मनमाने कारण बताकर बाहर कर दिया गया। सिलेक्शन में भेदभाव का आरोप खिलाड़ियों के अनुसार, सिलेक्शन कमेटी की चेयरपर्सन पूनम यादव सिलेक्शन प्रक्रिया में भेदभाव कर रही हैं। आरोप है कि पूनम यादव अलवर की एक क्रिकेट अकादमी से जुड़ी हुई हैं और वहां से आने वाली खिलाड़ियों को नियमों के विपरीत तरजीह दी जा रही है। खिलाड़ियों ने दावा किया कि BCCI U-23 टूर्नामेंट के मैचों में भी कमजोर प्रदर्शन करने वाली इन्हीं खिलाड़ियों के कारण टीम को हार झेलनी पड़ी, जबकि बेहतर रिकॉर्ड रखने वाली खिलाड़ियों को सिलेक्शन का मौका नहीं मिला। यहां तक कि जब सिलेक्शन के मैच हुए तो बैटिंग लाइनअप को चेंज कर यादव ने खिलाड़ियों की परफॉमेंस को प्रभावित किया। सिलेक्टर्स का पसंद कर रही भविष्य का फैसला विवाद सिर्फ प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। खिलाड़ियों का कहना है कि सिलेक्शन कमेटी की सदस्य माया जाट, रितिका जैन और हर्षिता मकवाना लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों का उल्लंघन करते हुए सिलेक्टर बनी हैं। नियमों के अनुसार, जिन पदों पर वे काबिज हैं, वे अनुमत नहीं हैं, फिर भी उन्हें सिलेक्टर बनाकर चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया है। खिलाड़ियों का दावा है कि सिलेक्शन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और सिलेक्टर्स की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद भविष्य का फैसला कर रही है। टॉप-5 में रहने वाली खिलाड़ी को बाहर किया एक महिला खिलाड़ी ने बताया कि U-19 कैंप के लिए 30 खिलाड़ियों को चुना गया है, लेकिन इनमें कई ऐसी खिलाड़ी शामिल हैं, जिनका हालिया प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। वहीं लीडरबोर्ड पर शीर्ष 5 में रहने वाली खिलाड़ी को सिर्फ फील्डिंग ठीक नहीं है ,जैसे तर्क देकर बाहर कर दिया गया। दूसरी ओर, कुछ खिलाड़ी जिन्होंने मात्र 39 रन बनाए, उन्हें कैंप में स्थान दे दिया गया। लोढ़ा कमेटी के दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन खिलाड़ियों ने यह भी आरोप लगाया कि पूनम यादव न सिर्फ एक निजी एकेडमी से जुड़ी हैं। बल्कि, राजस्थान स्कूल क्रिकेट टीम की सिलेक्टर भी हैं। जो लोढ़ा कमेटी के दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। इससे हितों का टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) पैदा होता है। जो सिलेक्शन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता हैं। इस विवाद पर खिलाड़ियों ने RCA से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और योग्यता आधारित हो सके। वहीं, दैनिक भास्कर डिजिटल ने इस पूरे मामले पर पूनम यादव से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई। RCA में जारी यह विवाद महिला क्रिकेटरों के भविष्य और चयन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एडहॉक कमेटी कन्वीनर बोले- कार्रवाई होगी एडहॉक कमेटी कन्वीनर दीनदयाल कुमावत ने कहा कि विमेंस टीम के सिलेक्टर्स के खिलाफ मुझे भी शिकायत मिली थी। जिसमें बताया गया है कि कुछ सिलेक्टर जहां एक भी नेशनल मैच नहीं खेली है। जबकि कुछ शिक्षा विभाग की सिलेक्शन कमेटी में है। जांच के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जो भी इसमें दोषी होगा। उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।