Crisis Management: मध्य पूर्व का ‘पॉवर हाउस’ कहा जाने वाला ईरान इस समय आंतरिक और बाहरी चुनौतियों के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। लेकिन ईरान की सड़कों पर मची यह अफरा-तफरी सिर्फ तेहरान तक सीमित नहीं है, इसका नई दिल्ली के रणनीतिक और आर्थिक हितों पर सीधा असर पड़ रहा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में बढ़ती अस्थिरता भारत के लिए जितनी बड़ी चिंता है, चीन और पाकिस्तान के लिए यह उतना ही बड़ा अवसर साबित हो सकता है।भारत ने पाकिस्तान को नजरअंदाज कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँचने के लिए ईरान के चाबहार पोर्ट (Chabahar Port Status) में भारी निवेश किया है। यह बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से ‘गेम चेंजर’ है। यदि ईरान (India Iran Relations) में हिंसा और अस्थिरता बढ़ती है, तो चाबहार परियोजना का काम ठप हो सकता है। ऐसे में भारत का मध्य एशिया (China Iran 400 Billion Deal) तक का व्यापारिक मार्ग बंद होने के कगार पर पहुँच जाएगा, जिसका सीधा फायदा चीन के ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) और पाकिस्तान के ‘ग्वादर पोर्ट’ (Pakistan Gwadar vs Chabahar) को मिलेगा।
