राजस्थान में वन मंत्री संजय शर्मा और अलवर कलेक्टर अर्तिका शुक्ला की लड़ाई मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पहुंच गई है। सीएमओ ने मंत्री-आईएएस विवाद पर नाराजगी जताई है। सूत्रों के मुताबिक पूरे विवाद पर अलवर कलेक्टर अर्तिका शुक्ला की विदाई तय है। आईएएस अफसरों की अगली ट्रांसफर लिस्ट में उनका नाम आ सकता है। सीएमओ तक विवाद पहुंचने के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव टू सीएम अखिल अरोड़ा ने अलवर जिला कलेक्टर अर्तिका शुक्ला से बात की और विवाद की वजह जानी। सूत्रों के मुताबिक सीएमओ में तैनात एक अन्य वरिष्ठ आईएएस ने कलेक्टर को तथ्यात्मक ब्योरा भेजने के निर्देश दिए। अलवर कलेक्टर ने उसी दिन यानी 12 अगस्त को रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दी है। फिलहाल विवाद से अर्तिका शुक्ला पर तबादले की तलवार लटकी हुई है। सबसे पहले जानिए क्या थी विवाद की वजह… मामला 2012 की सफाईकर्मियों की भर्ती से जुड़ा है। 2019 में हाईकोर्ट ने डीएलबी को निर्देश दिए कि वे एक कमेटी बनाकर निर्णय ले। डीएलबी ने 2019 में कमेटी बनाई, लेकिन 2023 तक कोई फैसला नहीं लिया। तब कांग्रेस की सरकार थी। वन मंत्री संजय शर्मा का कहना है कि सरकार बदलते ही सफाईकर्मियों की यूनियन मेरे पास आई। मैंने मंत्री झाबर सिंह खर्रा को पत्र लिखा। इसके बाद डीएलबी ने कार्रवाई शुरू की। 2025 में डीएलबी ने नगर निगम को निर्देशित किया कि नियमों के तहत जिनको नियुक्ति दे सकते हैं, उन्हें दें। उसके बाद कमिश्नर सोहन सिंह ने 329 अभ्यर्थियों के फॉर्म जांच करने की बात कही। एक महीने पहले कमिश्नर ने कहा कि 100 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दे सकते हैं। मंत्री ने कहा- 100 का नियुक्ति-पत्र दे दो। बाकी जैसे-जैसे जांच होगी, दे दीजिएगा। मंत्री का कहना है- कमिश्नर ने फिर 82 का बताया। इसके बाद 69 का बताया। सफाई कर्मचारियों की यूनियन ने कहा कि आप 69 को दिला दीजिए, कोई विरोध नहीं है। मंत्री का कहना है कि कलेक्टर से भी बात की थी। उन्होंने कहा था कि 69 को दिया तो कोई विरोध तो नहीं होगा। इसी दौरान कमिश्नर सोहन सिंह का भरतपुर ट्रांसफर हो गया। मंत्री ने 69 के नियुक्ति पत्र के लिए कलेक्टर से बात की। मंत्री का कहना है कि कलेक्टर अर्तिका शुक्ला ने कहा- कमिश्नर सोहन सिंह का तबादला हो गया है। ऐसे में मैं किसी को यहां बुलाकर जॉइन नहीं करवा सकती। मंत्री का कहना है कि कलेक्टर का रुख हठधर्मिता का था। बस यहीं से विवाद हो गया। इसके बाद मंत्री धरने पर बैठ गए। मंत्री-कलेक्टर दोनों के पहले भी हो चुके हैं विवाद संजय शर्मा से जुड़े विवाद… विवाद- 1 : सीकर कलेक्टर से बहस 23 दिसंबर 2025 को प्रभारी मंत्री संजय शर्मा सुबह शहरी सेवा शिविर में पहुंचे। कर्मचारियों की खाली कुर्सियां देखकर नाराजगी जताई। प्रभारी मंत्री ने शिविर के कार्यों के बारे में रेवेन्यू ऑफिसर महेश योगी को पूछा तो वे मोबाइल में सूची दिखाने लगे। इस पर मंत्री गुस्सा हो गए। कलेक्टर ने नगर परिषद अफसरों का बचाव किया तो मंत्री ने कहा- इन चोरों को संरक्षण देने की जरूरत नहीं है कलेक्टर साहब। इसके बाद मंत्री शिविर छोड़कर जयपुर आ गए थे। विवाद के बाद भी मुकुल शर्मा 4 अप्रैल, 2026 तक पद पर बने रहे। बाद में सरकार ने उनका मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में स्पेशल सेक्रेटरी के पद पर तबादला कर दिया। एक तरह से सरकार ने आईएएस मुकुल शर्मा को प्राइम पोस्टिंग दे दी। विवाद- 2 : अलवर यूआईटी सचिव ने नहीं माने आदेश 24 जून, 2026 को अलवर शहर में कोचिंग सील की गई थीं। यूआईटी सचिव स्नेहल ने बिना अनुमति के चल रहे कोचिंग संचालकों से 500 रुपए प्रति वर्गमीटर से जुर्माना जमा करने को कहा था। जिनके पास अनुमति थी, लेकिन नियमों का उल्लंघन मिला, उन्हें 300 रुपए प्रति वर्गमीटर के हिसाब से राशि जमा करानी थी। वन मंत्री संजय शर्मा ने आदेश दिया था कि अचानक की गई कोचिंग सील कार्रवाई से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कोचिंग संचालकों से एक शपथ पत्र लेकर तुरंत सील हटाई जाए। इसके बावजूद यूआईटी ने सील हटाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, बाद में नगर निगम आयुक्त ने अगले दिन सील हटवा दी। अलवर कलेक्टर अर्तिका शुक्ला से जुड़े विवाद विवाद-1 : जिला प्रमुख ने साधा था निशाना अलवर जिला प्रमुख बलबीर छिल्लर ने 23 अप्रैल, 2026 को अलवर जिला परिषद की बैठक में कलेक्टर पर निशाना साधा था। छिल्लर ने कहा- अर्तिका शुक्ला इस पद के योग्य नहीं हैं। उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। छिल्लर का कहना था कि जिला परिषद की बैठक में अर्तिका शुक्ला मीटिंग में कभी नहीं आईं। न ही अपना कोई प्रतिनिधि भेजती हैं। दरअसल, पार्षदों ने मुद्दा उठाया कि मीटिंग में एसपी-कलेक्टर क्यों नहीं आते हैं? हमारी समस्याएं कौन सुनेगा? इस पर जिला प्रमुख ने कलेक्टर अर्तिका शुक्ला को निशाने पर ले लिया था। विवाद-2 : आरपीएस शीशराम को मीटिंग से निकाला 9 दिसंबर, 2025 को खैरथल-तिजारा में जिला स्तरीय बैठक के दौरान साइबर क्राइम की जमीन के आवंटन का मुद्दा उठाने पर कलेक्टर ने आरपीएस शीशराम को मीटिंग से बाहर कर दिया था। इस पर राजस्थान पुलिस सेवा परिषद ने मुख्य सचिव को ज्ञापन को देकर कार्रवाई की मांग भी की थी। हालांकि, बाद में दोनों अधिकारियों के बीच सुलह हो गई थी। कुछ लोगों का कहना था कि बैठक के दौरान आरपीएस अधिकारी द्वारा बार-बार अपने सवाल उठाने पर कलेक्टर अर्तिका शुक्ला नाराज हो गई थीं। संजय शर्मा बोले- अधिकारी गलत करेंगे तो डांट भी पड़ेगी वन मंत्री संजय शर्मा ने विवाद पर कहा- कमियों को लेकर मंत्री का अफसरों को डांट लगाना गलत नहीं होता है। अधिकारी गलत करेंगे तो डांट भी पड़ेगी। मंत्रियों से जनता को बहुत उम्मीद रहती है। लोग बड़ी उम्मीद के साथ हमारे पास आते हैं। अफसर राज्य सरकार से बड़े नहीं हैं। मेरे लिए अलवर की जनता के हित सर्वोपरि है। भास्कर ने अलवर कलेक्टर अर्तिका शुक्ला का भी पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। खाद्य मंत्री सुमित गोदारा बोले- अफसर प्राथमिकता से करें काम राजस्थान में ब्यूरोक्रेसी और मंत्रियों के बीच टकराव पर खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने कहा- मंत्रियों का काम सरकार की नीतियां बनाना है। जनता उम्मीद बहुत ज्यादा रखती है। जब कोई कार्य नहीं होता है तो कहीं न कहीं टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जनप्रतिनिधि कोई सार्वजनिक काम लेकर आए तो उसे अफसरों को तत्परता और प्राथमिकता से करना चाहिए। … यह खबर भी पढ़ें… अलवर कलेक्टर के खिलाफ 5 घंटे मंत्री का धरना:बोले- उसे तो लूटकर खाना है, हरामखोरी कर रखी है; सफाईकर्मियों की नियुक्ति पर विवाद अलवर नगर निगम में 12 अगस्त को सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति के मुद्दे पर हंगामा हो गया। वन राज्य मंत्री संजय शर्मा भी सफाई कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए। मंत्री ने कलेक्टर अर्तिका शुक्ला और नगर निगम कमिश्नर सोहन सिंह नरूका पर जमकर नाराजगी जताई। (पूरी खबर पढ़ें)