Bharatpur : जिस भाई को परिवार ने 20 साल पहले खो दिया था, वह अचानक बहन के सामने खड़ा था। बहन आसमा खातून ने जैसे ही भाई बबलू को देखा, उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। बबलू शुरुआत में बहन को पहचान नहीं पाया, लेकिन बचपन की बातें साझा की गईं तो यादों का सिलसिला लौट आया। कुछ ही देर में दोनों भाई-बहन एक-दूसरे को पहचान गए। भरतपुर के अपना घर आश्रम में हुआ यह मिलन दो दशक से चले आ रहे इंतजार के खत्म होने की भावुक कहानी बन गया। करीब 20 साल पहले 15 वर्ष की उम्र में बबलू मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण बिना बताए घर से निकल गया था।