बीकानेर में तलाक के बाद ANM पत्नी का पीछा कर हत्या करने वाले पति को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। पति ने पत्नी के सिर पर पत्थर मार कर उसकी हत्या की थी। हत्या के बाद आरोपी ने अपने साले विकास को फोन कर कहा, “सुमन को तो मैंने मार दिया है, अब अगला नंबर तेरा है।” 3 साल पुराने मामले में बीकानेर की अपर सेशन न्यायालय संख्या-5 ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया है। सुमन चौधरी की हत्या के मामले में झुंझुनूं निवासी कृष्णपाल सिंह को दोषी माना है। ANM पत्नी की हत्या पीड़ित पक्ष के वकील के अनुसार, कृष्णपाल सिंह और सुमन चौधरी की शादी साल 2003 में हुई थी। सुमन साल 2011 में एएनएम के पद पर लगीं। उनकी पहली पोस्टिंग घीगासर गांव में हुई थी, बाद में उनका तबादला बरसिंहसर हो गया। इसी दौरान पोस्ट ऑफिस में कार्यरत कृष्णपाल गबन के एक मामले में फंस गया था और उसे जेल भी जाना पड़ा। इसके बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। कृष्णपाल ने साल 2019 में तलाक की अर्जी लगाई और उसी साल दोनों का तलाक हो गया। तलाक के बाद भी आरोपी लगातार सुमन का पीछा करता था, उनके साथ मारपीट करता था और जान से मारने की धमकी देता था। इस संबंध में परिजनों ने पहले भी शिकायतें की थीं। साले को भी देता था धमकी पीड़ित पक्ष के वकील के अनुसार, 22 अगस्त 2023 को कृष्णपाल सिंह ने सुमन चौधरी पर पीछे से पत्थर से हमला किया। सिर पर पत्थर लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गई और उनका निधन हो गया। पुलिस ने घटनास्थल से खून से सना पत्थर और अन्य साक्ष्य जब्त किए थे। सुनवाई के दौरान गवाहों ने बताया कि घटना के बाद आरोपी ने अपने साले विकास को फोन कर कहा, “सुमन को तो मैंने मार दिया है, अब अगला नंबर तेरा है। तुझे भी मार दूंगा। ” अदालत ने माना कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड से यह भी पुष्ट हुआ कि घटना के बाद आरोपी ने विकास को फोन किया था। डीएनए रिपोर्ट और टी-शर्ट बने सबूत जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना के समय पहनी गई खून से सनी टी-शर्ट बरामद की। घटनास्थल से मिले पत्थर और टी-शर्ट पर मिले रक्त के नमूनों की एफएसएल जांच में डीएनए प्रोफाइल मृतका से मेल खाई। आरोपी के हाथ पर मिले चोट के निशानों को भी अदालत ने अन्य साक्ष्यों के साथ महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने कहा- सभी सबूत आरोपी के खिलाफ अदालत ने अपने फैसले में कहा कि तलाक के बाद लगातार प्रताड़ना, हत्या से पहले दी गई धमकियां, घटना के बाद किया गया फोन, खून से सनी टी-शर्ट, घटनास्थल से बरामद पत्थर और वैज्ञानिक साक्ष्य मिलकर ऐसी पूरी श्रृंखला बनाते हैं, जिससे संदेह से परे साबित होता है कि हत्या कृष्णपाल सिंह ने ही की। इसी आधार पर अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी करार दिया।