Global Economy: विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 56वीं वार्षिक बैठक स्विट्जरलैंड के बर्फीले शहर दावोस में 19 जनवरी से शुरू होने के कारण आर्थिक जगत में हलचल मच गई है। इस बार का दावोस सम्मेलन (Davos 2026) पिछले कई दशकों में सबसे अलग है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपने भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल के साथ ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति को धार देने पहुंच रहे हैं, तो दूसरी तरफ भारत अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था (Indian Economy) और तकनीकी कौशल के साथ वैश्विक मंच पर अपनी दावेदारी पेश कर रहा है। दावोस 2026 का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु डोनाल्ड ट्रंप हैं। ट्रंप ने सत्ता संभालते ही दुनिया के कई देशों पर, विशेषकर यूरोपीय देशों पर आयात शुल्क की तलवार लटका दी है। ग्रीनलैंड मुद्दे पर यूरोपीय देशों के विरोध से नाराज ट्रंप ने इसे ‘ग्लोबल बुलीइंग’ (वैश्विक दादागिरी) के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। दावोस (WEF Summit) में इस बात पर बहस गर्म होगी कि क्या ट्रंप की ये नीतियां वैश्विक व्यापार को पूरी तरह ठप कर देंगी या फिर यह नए समीकरणों को जन्म देंगी।
