भारत में डिजिटल पेमेंट क्रांति का सबसे बड़ा चेहरा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक, हर स्तर पर यूपीआई ने लेनदेन को आसान और तेज बनाया है। लेकिन तेज विस्तार के पीछे छिपी लागत अब सिस्टम पर भारी पड़ने लगी है। शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी जीरो एमडीआर नीति के चलते बैंकों और फिनटेक कंपनियों की आय सीमित है। यही कारण है कि बजट 2026 से यूपीआई के लिए फंडिंग और कमाई के मॉडल पर बड़े फैसले की उम्मीद की जा रही है।