युवा पीढ़ी को बर्बादी की तरफ धकेल नशे का साम्राज्य खड़ा करने वाला 5 राज्यों का वांछित आरोपी रमेश अब पुलिस के हाथ लगा है। राजस्थान का टॉप-10 बदमाश तस्कर व एक लाख रुपए का इनामी है। एएनटीएफ और एटीएस की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन विषाणु बाहु के तहत इस एमडी किंग को गिरफ्तार किया है। ये बीते 8 साल से देश के कई राज्यों में एमडी ड्रग्स का जाल फैला रहा था।
राजस्थान के बाड़मेर, सिरोही सहित कई राज्यों में पिछले 2 साल में 5 एमडी फैक्ट्री खोल अरबों रुपए की कमाई कर फरार था। बाड़मेर के सेड़वा में पकड़ी गई एमडी फैक्ट्री का मुख्य सरगना था। मादक पदार्थ विरोधी कार्यबल राजस्थान की टीम ने बाड़मेर के धोरीमन्ना क्षेत्र के नेडी नाडी निवासी 31 वर्षीय रमेश कुमार उर्फ अनिल उर्फ रामलाल पुत्र सोहनलाल विश्नोई को गिरफ्तार किया है। आरोपी रमेश पर एनडीपीएस, लूट, मारपीट, वाहन चोरी, शराब तस्करी, फिरौती और अपहरण जैसे 31 मुकदमे हैं। सेड़वा एमडी फैक्ट्री का भी मास्टर माइंड रमेश एमडी बनाने का मुख्य सरगना रहा है। जोधपुर के कुड़ी भगतासनी इलाके में पकड़ी गई एमडी फैक्ट्री रमेश ने लगाई थी। बाड़मेर के सेड़वा में 23 जुलाई 2025 को एमडी फैक्ट्री पकड़ी गई थी, उसमें रमेश मुख्य सरगना था। सिरोही में भी पकड़ी गई फैक्ट्री का कर्ता-धर्ता रमेश ही था। इसके अलावा 2-3 अन्य जगह एमडी फैक्ट्री रमेश द्वारा लगाई थी। इस फॉर्मूला में ब्रोमो, कास्टिक सोडा, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, टार्लबन और एथिल अल्कोहल को मिलाकर केमिकल प्रक्रिया से एमडी बनाता था। फैक्ट्री लगा कर एमडी बनाने में महज 5-7 दिन ही लगते थे। महाराष्ट्र जेल में सरगना डॉ. बिरजू से संपर्क में आने के बाद रमेश एमडी के कारोबार में उतरा था। शुरूआत महाराष्ट्र से एमडी बनाकर राजस्थान में बेचने से की। इसके बाद इसको राजस्थान के अलग-अलग जिलों में स्थापित कर एमडी को गुजरात व महाराष्ट्र में बेचने लगा। एमडी के लिए मुंबई, पुणे और गुजरात से केमिकल मंगवाता था। सहयोगी डॉ. बिरजू के माध्यम से एमडी बनाने के एक्सपर्ट आते थे। इसके लिए स्थानीय स्तर पर पार्टनर बनाकर उनके ही घरों में फैक्ट्री सेटअप करवाता था।
1 लाख के केमिकल से 30 लाख की एमडी बनती थी रमेश के खिलाफ राजस्थान में 15-17, गुजरात में 8, तेलंगाना में 3, महाराष्ट्र में 2 और कर्नाटक में 1 मुकदमे खुद ने स्वीकार किया है। इसके अलावा आसाम, मणिपुर में भी खुद के बदले हुए नाम से मुकदमे दर्ज होने की सूचना है। 8 वर्षों से फरार रह कर नशे का काला कारोबार कर रहा था। एक किलो एमडी बनाने में जहां करीब एक लाख रुपए का खर्च आता था, वहीं बाजार में वही जहर 30 लाख रुपए तक में बेचता था। आरोपी रमेश खुद का नाम बदलता रहता था, कभी अनिल तो कभी रामलाल भी नाम रखे। जिस राज्य में जाता था, वैसा ही भेष बदल देता। मजदूर बने पुलिसवाले, ट्रेवल एजेंट से मिला सुराग एटीएस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि एएनटीएफ की टीम कोलकाता में हुलिया बदलकर मजदूर बनी और हावड़ा की एक स्टील की दुकान पर काम करने वाले युवकों से दोस्ती की। वहीं से पता चला कि रमेश आजकल धार्मिक हो गया है और गंगासागर जाने की तैयारी में है। टीम ने गंगासागर के ट्रेवल एजेंट को विश्वास में लिया, एजेंट की पत्नी रमेश के घर खाना बनाती थी। यहीं से पुलिस ने दबोच लिया। रमेश कुमार खुद को केमिस्ट्री का टीचर बताता था। पिछले कुछ सालों में 12 ज्योतिर्लिंगों और चारों धाम की यात्राएं कर चुका है। ज्यादातर सफर फ्लाइट से करता था। पहले पार्टनर बनाए, फिर उन्हीं के घर फैक्ट्रियां लगाई रमेश इतना शातिर था कि उसने अपनों को भी नहीं बख्शा। उसने अलग-अलग जिलों में पार्टनर बनाए, उन्हीं के घर-जमीन पर फैक्ट्रियां लगवाई और खुद पर्दे के पीछे रहकर करोड़ों कूट लिए। भंवरी देवी हत्या कांड के आरोपी बिशनाराम का यह पूर्व सहयोगी भी रहा है। रमेश ने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद शुरूआत गाड़ी चोरी से की। सैकड़ों गाड़ियां चोरी कर तस्करों को बेची। धोरीमन्ना में मार्बल की फैक्ट्री, कार डेकोर की दुकान भी लगाई। शानदार मकान, फार्म हाउस, प्लॉट सहित करोड़ों की संपत्ति अर्जित की।