नमस्कार कांग्रेस नेता सचिन पायलट को बाड़मेर में फैन मिल गया। उसने अपने चहेते नेता से मन की बात कह दी। भीलवाड़ा में भूगोल के लेक्चरर का तबादला हुआ तो बच्चों ने आसमान सिर पर उठा लिया। डूंगरपुर के सागवाड़ा में नगरपालिका अध्यक्ष का पद एक है लेकिन दो कुर्सियां लगाकर दो अध्यक्ष बैठे हैं। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. सचिन पायलट से मिला नन्हा फैन बात थी बाड़मेर और बालोतरा का भूगोल बदलने की। इसे लेकर कांग्रेस नेता हेमाराम चौधरी जनता के साथ धरने पर बैठे। धरने में कांग्रेस के दिग्गज पहुंचे। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, बायतु विधायक हरीश चौधरी, युवा नेता निर्मल चौधरी समेत कई नेता पहुंचे। रथ पर चढ़कर सभी नेताओं ने धोरीमन्ना में रैली निकाली। इसके बाद नेतागण पूर्व जिलाध्यक्ष गफूर अहमद और निवर्तमान प्रधान शमा बानो के घर पहुंचे। सामान्य बातचीत का दौर चल रहा था। इतनी देर में शमा बानो के नन्हे साहबजादे दिग्गजों के बीच आ गए। सचिन पायलट के पास जाकर बोले- मैं आपका बहुत बड़ा फैन हूं। यह सुनकर बेटे की मां भी चौंक गई और खूब हंसी। पायलट और नन्हे फैन के बीच संक्षिप्त लेकिन रोचक संवाद हुआ। पायलट ने कहा- थैंक्यू तो फैन ने कहा- वैलकम। 4-5 साल की उम्र के बच्चे कार्टून करेक्टर के फैन होते हैं, मार्वल फिल्म्स के सुपर हीरोज के फैन होने हैं, बॉलीवुड के सितारों के फैन होते हैं। लेकिन राजनीतिक परिवार का बच्चा फैन निकला बड़े नेताजी का। शुभ संकेत। 2. मास्टरजी के लिए निकले आंसू मास्टर जी ने वेतन के लिए नौकरी नहीं की। स्कूल को स्कूल नहीं समझा। छुट्‌टी के लिए जान नहीं दी। पढ़ाने से कतराए नहीं। बच्चों को मुर्गा नहीं बनाया। बल्कि सरकारी स्कूल की पढ़ाई को उन्होंने मिशन बनाया। स्कूल को अपना परिवार बना लिया। बच्चों के भविष्य के लिए जी-जान एक की। छात्र-छात्राओं का मनोबल बढ़ाया और बढ़िया रिजल्ट दिया। लेकिन शास्त्रों में कहा है- जो आता है वह जाता भी है। ऐसा ही नियम शिक्षा विभाग में भी है। मास्टर जी का तबादला हो गया। रूटीन प्रोसेस है। होता है। लेकिन बच्चों ने आसमान को सिर पर उठा लिया। इधर तबादले का लेटर आया और दूसरे ही दिन छात्र-छात्राओं ने स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया। बच्चे धरने पर बैठ गए। छात्राएं फूट-फूटकर रोने लगीं। छात्र नारा लगाने लगे- जब तक सूरज चांद रहेगा, शंकरजी का नाम रहेगा। पहले तो लगा कि एक-आध घंटे के हो-हल्ले के बाद सब कुछ शांत हो जाएगा। लेकिन बच्चे अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए। छात्रों ने स्कूल में ही पड़ाव डाल दिया। ठंडी रात में भी बच्चे क्लासरूम में रजाई के साथ धरने पर मिले। दूसरे दिन भी धरना जारी रहा। तीन दिन बीत गए। रामचरित मानस का दोहा है- विनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीत। बोले राम सकोप तब-भय बिनु होय न प्रीत। दोहे से प्रेरित होकर बच्चे टीसी का प्रार्थना पत्र लेकर स्कूल पहुंच गए और धमकी दी-सुनवाई नहीं होगी तो हम भी अपनी टीसी निकलवा लेंगे। 3. पद एक, कुर्सी दो, अध्यक्ष भी दो एक अनार है, दो बीमार हैं। लेकिन अनार के लिए छीना-झपटी नहीं मची है। बल्कि बांट कर अनार खाया जा रहा है। मामला डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा नगरपालिका का है। जहां अध्यक्ष पद एक है, जबकि अध्यक्ष दो-दो बैठे हैं। दोनों अध्यक्षों की कुर्सी लगी है। कुर्सी पर दोनों बैठे भी हैं और हंसी-मजाक भी चल रहा है। एक अध्यक्ष भाजपा के हैं तो दूसरे कांग्रेस के। फोटो भी दोनों हंसते हुए खिंचा रहे हैं। हुआ यूं कि कांग्रेस वाले अध्यक्ष महोदय को 9 महीने पहले सस्पेंड कर दिया गया था। वे सस्पेंशन के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने सस्पेंशन पर स्टे लगा दिया। इस दौरान कुर्सी खाली नहीं रही। उस पर भाजपा वाले अध्यक्ष जी काबिज हो गए। कोर्ट का स्टे मिलते ही कांग्रेस वाले सीधे दफ्तर पहुंचे और सहायकों के माल्यार्पण की मदद से कुर्सी पर काबिज हो गए। नेम प्लेट भी लगवा ली। दीवार पर टंगी अध्यक्ष पद की सूची भी संशोधित कर दी गई। यह जानकारी मिलने पर भाजपा वाले महोदय भी पहुंच गए। कांग्रेस वाले अध्यक्ष ने भाजपा वाले अध्यक्ष को सम्मान दिया और पास में एक कुर्सी उनकी भी लगवा दी। भाजपा वाले अध्यक्ष महोदय ने कहा- अभी सरकार से कोई आदेश नहीं मिला। मार्गदर्शन मांगा है। अगर सरकार कहेगी तो खुद ही अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दूंगा। यानी तब तक वे भी अध्यक्ष रहेंगे और ये भी। 4. चलते-चलते… दिग्गजों ने खूब पतंग उड़ाई। कई नेता छतों पर चढ़कर दांव-पेंच लगाते दिखे। कई सार्वजनिक कार्यक्रम में पहुंचे। नेतागण को पतंग का खेल भाता है। इसमें भी वही सब होता है जो राजनीति में होता है। हवा का रुख देखा जाता है। चरखी विश्वस्त के हाथों में सौंपी जाती है। कमान खुद संभाली जाती है। ढील दी जाती है। अवसर देखकर खींच मारी जाती है। पेंच लड़ाया जाता है। ऊपर उड़ने वाले प्रतिद्वंद्वी को हवा में ही मार गिराया जाता है। कई बार प्रतिद्वंद्वी सद्दे में से ही कट मार जाता है। दौसा में विधायक डीसी बैरवा पतंगबाजी करने युवाओं के बीच पहुंच गए। पतंग उड़ाई। इस दौरान डीजे पर बज रहे गाने की तान हवा पर हावी हो गई। माननीय ने डोर पतंग छोड़ ठुमके लगाना शुरू कर दिया। खूब नाचे। नाच में भी पतंगबाजी के दांव-पेंच झलके। (इनपुट सहयोग- विजय कुमार (बाड़मेर), मनीष जैन (भीलवाड़ा), चिंतन जोशी (डूंगरपुर), राघवेंद्र गुर्जर (दौसा)।) वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…