बढ़ती महंगाई के बीच देश के बड़े शहरों में 50,000 रुपये की मासिक सैलरी को कई लोग सीमित आय मानते हैं। हालांकि, पर्सनल फाइनेंस के आंकड़े बताते हैं कि नियमित निवेश और चक्रवृद्धि ब्याज के असर से इसी सैलरी के आधार पर लंबी अवधि में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड तैयार किया जा सकता है। इसके लिए समय, अनुशासन और तय निवेश ढांचे की भूमिका अहम होती है।