भास्कर न्यूज | अमृतसर भारतीय किसान यूनियन ने पंजाब के लोगों की जायज मांगों को मनवाने के लिए संघर्ष जारी रखते हुए जिलाधीश कार्यालय के समक्ष 2 घंटे तक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन बीकेयू के प्रदेश प्रधान पलविंदर सिंह महल की अगुवाई में किया गया। यूनियन ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार केंद्र सरकार के दबाव में आकर इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल को चुपचाप लागू करने की तैयारी कर रही है। बीकेयू इस बिल का कड़ा विरोध करता है और मांग करता है कि बिजली उपभोक्ताओं के घरों के सामने जबरदस्ती चिप मीटर न लगाए जाएं। उन्होंने राज्य की मौजूदा सरकार और अन्य राजनीतिक पार्टियों की बिल पर चुप्पी को लेकर आलोचना की और कहा कि पॉलिसी पंजाब के लोगों को मंजूर नहीं है। यूनियन ने स्पष्ट किया कि पंजाब के लिए नुकसानदायक ऐसी पॉलिसी को लागू नहीं होने दिया जाएगा। यूनियन ने बिजली विभाग के निजीकरण को रोकने और कॉन्ट्रैक्ट भर्ती के बजाय परमानेंट कर्मचारियों को रखने की मांग की। साथ ही कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की भी अपील की गई। किसानों ने मांग की कि केंद्र सरकार द्वारा विदेशों से आयात की जाने वाली फसलों के टेंडर रद्द किए जाएं और ये फसलें देश के किसानों से खरीदी जाएं। किसानों द्वारा जलाई जाने वाली पराली को पॉल्यूशन कंट्रोल से बाहर रखा जाए, जबकि हवा और पानी को प्रदूषित करने वाली इंडस्ट्रीज़ के खिलाफ सख्त कानून बनाए जाएं। पराली जलाने के लिए किसानों पर किए गए सभी गैर-कानूनी केस तुरंत रद्द किए जाएं। किसानों की उपजाऊ ज़मीनों को अत्यधिक दामों पर एक्वायर करके कॉर्पोरेट घरानों को देने से रोका जाए। जिस किसान की ज़मीन एक्वायर हो, उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। मनरेगा मजदूरों को उनकी रोज की मज़दूरी देने के बाद होने वाली भुगतान संबंधी परेशानी पूरी तरह खत्म की जाए और मजदूरी सीधे उनके अकाउंट में ट्रांसफर की जाए। नेताओं और उनके रिश्तेदारों के बनाए गए फर्जी मनरेगा कार्डों की पहचान करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। पंजाब में पिछली बाढ़ से किसानों और मजदूरों को हुए जान-माल के भारी नुकसान का जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए। खेत मजदूरों को भी उचित मुआवजा मिलना चाहिए। यूनियन ने खुलेआम हो रही गैर-कानूनी रेत माइनिंग पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि रात भर बड़े-बड़े टिपर रेत लेकर गुजरते रहते हैं, लेकिन उन्हें कोई नहीं रोक रहा।