चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं इलाके में खेत में लगी लोहे की जाली में मादा लेपर्ड फंस गई। लेपर्ड बाहर निकलने के लिए लगातार कोशिश करती रही, लेकिन जाली से निकल नहीं पाई। रविवार सुबह 9 बजे ग्रामीण खेत में पहुंचा तो उसे गुर्राने की आवाज सुनाई दी। उसने देखा तो लोहे की जाली में लेपर्ड फंसी नजर आई। इसके बाद उसने अन्य ग्रामीणों और वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। दोपहर करीब 12 बजे वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंची और लेपर्ड को लोहे की जाली से निकाला, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। मामला नाथू रामजी का खेड़ा गांव का है। खेत में पहुंचा तो गुर्राने की आवाज आई ग्रामीण भंवरलाल ने बताया- मैं सुबह खेत की रखवाली के लिए गया था। खेत में पहुंचा तो गुर्राने की आवाज सुनाई दी। जिस तरफ से आवाज आ रही थी मैं उस तरफ गया तो लोहे की जाली में लेपर्ड फंसी दिखी। वह बाहर निकलने के लिए बार-बार आगे पीछे हो रही थी। मैंने इसके बारे में गांव में लोगों को बताया तो बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे। इसके बाद बेगूं में वन विभाग को सूचना दी गई। बस्सी वन्यजीव अभयारण्य और चित्तौड़गढ़ से टीमें मौके पर मौके पर पहुंची और लेपर्ड को जाली से बाहर निकाला। लेपर्ड को रेस्क्यू किया तब तक मौत हो चुकी थी डीएफओ केतन कुमार ने बताया- हमारी टीम ने करीब 30 मिनट तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर लेपर्ड को जाली से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। लेपर्ड के शव को चित्तौड़गढ़ लाकर पोस्टमॉर्टम किया गया और फिर अंतिम संस्कार कर दिया गया। डीएफओ ने बताया- मादा लेपर्ड की उम्र करीब 2 साल थी। लेपर्ड की मौत किन परिस्थितियों में हुई और वह जाली में कैसे फंसी, इसकी जांच की जाएगी। मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद होगा। 15 दिनों से गांव का आसपास दिखाई दे रही थी लेपर्ड ग्रामीणों ने बताया- खेत की फसल को रोजड़ों (नीलगाय) से बचाने के लिए तारबंदी कर रखी है। गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर जोगणिया माता घाटी के पहाड़ और जंगल है। जंगल के आसपास के गांवों में लेपर्ड का मूवमेंट बना रहता है। पिछले करीब 15 दिनों से जंगल से निकलकर लेपर्ड गांव के आसपास दिखाई दे रही थी। एक सप्ताह पहले उसने एक बछड़े का भी शिकार भी किया था। राजस्थान के इन जिलों में हैं लेपर्ड की मौजूदगी राजस्थान में जयपुर, अलवर, सीकर, भरतपुर, करौली, बूंदी, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर, पाली, सिरोही, जालोर, डूंगरपुर, झुंझुनूं, सवाईमाधोपुर, धौलपुर, कोटा, झालावाड़, बारां, टोंक और दौसा जिलों में लेपर्ड की मौजूदगी है। इनके अलावा बाड़मेर और जोधपुर में कभी-कभी अजमेर, पाली, राजसमंद, सिरोही के जंगलों से लेपर्ड का मूवमेंट होता है। ये खबरें भी पढ़ें खेत की बाड़ पर लगे तार में फंसा लेपर्ड, मौत:डॉक्टर बोले- दम घुटने से तोड़ा दम; वन विभाग ने करवाया अंतिम संस्कार टोंक में लेपर्ड की साइटिंग के बीच शुक्रवार को एक लेपर्ड की दर्दनाक मौत हो गई। एक खेत की बाड़ के तारों की जाली में लेपर्ड(मेल) की गर्दन फंस गई, जिसके कारण उसका दम घुट गया और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। (पूरी खबर पढ़ें)