राजस्थान में इस साल मानसून की बेरुखी और औसत से काफी कम बारिश के कारण अकाल के हालात पैदा हो गए हैं। फसलों की खराब स्थिति और पानी की कमी को देखते हुए जोधपुर, बांसवाड़ा और जालोर समेत 14 जिलों की कुल 80 तहसीलों को ‘गंभीर एवं मध्यम सूखाग्रस्त’ घोषित किया गया है। इनमें जोधपुर जिले की 12 तहसीलें, जालोर की 10, बाड़मेर की 10, बालोतरा की 9, पाली की 8, डूंगरपुर की 7, जैसलमेर की 7, फलोदी की 7, बांसवाड़ा की 3, ब्यावर की 2, चूरू की 2, बीकानेर की 2, नागौर की 1 और सिरोही की 1 तहसील शामिल है। राज्य सरकार ने रविवार को इसकी अधिसूचना जारी की। मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने बताया- प्रदेश के कई हिस्सों में अकाल के हालात हैं, ऐसे में सरकार ने संवेदना दिखाते हुए यह फैसला लिया है। प्रभावित तहसीलों में पशुओं के लिए सरकार की ओर से चारा डिपो खोले जाएंगे और हरसंभव मदद की जाएगी। अधिसूचना जारी, 6 महीने तक प्रभावी रहेंगे कानूनी प्रावधान आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सूखाग्रस्त घोषित किए गए क्षेत्रों में संबंधित कानूनी प्रावधान अधिसूचना प्रकाशन की तारीख से आगामी 6 महीने तक लागू रहेंगे। सरकार ने बारिश की कमी, भूजल स्तर में गिरावट, सतही जल की उपलब्धता और फसलों के नुकसान का वैज्ञानिक आकलन करने के बाद यह निर्णय लिया है। सबसे कम बारिश पाली और जैसलमेर जिले में हुई मौसम विभाग के अनुसार, इस बार सबसे कम बारिश पाली और जैसलमेर जिले में हुई है, यहां सामान्य से 58 और 54 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। जालोर जिले में 50 और बांसवाड़ा जिले में 39 फीसदी कम बारिश हुई है। इसके अलावा सिरोही जिले में सामान्य से 36 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। बालोतरा जिले में 28 फीसदी, डूंगरपुर जिले में 24 फीसदी और जोधपुर जिले में 27 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी फसलें सूख गईं और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। किसानों को राहत मिलने की बंधी उम्मीद कम बारिश के कारण कृषि गतिविधियां ठप होने से परेशान किसानों के लिए यह घोषणा राहत की उम्मीद लेकर आई है। जिला प्रशासन अब प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य, पशुओं के लिए चारे-पानी का प्रबंध और अन्य आवश्यक प्रशासनिक कदम उठा सकेगा। हालांकि, तहसीलवार प्रभावित गांवों और मिलने वाली राहत व्यवस्थाओं की विस्तृत गाइडलाइंस जल्द स्पष्ट होगी। क्या होता है सूखाग्रस्त क्षेत्र ‘सूखाग्रस्त’ का मतलब उस क्षेत्र या इलाके से है, जहां बहुत कम बारिश होने या मानसून की कमी के कारण पानी और चारे का गंभीर संकट हो जाता है। किसी क्षेत्र में सामान्य से काफी कम बरसात होती है, जिससे खेती पूरी तरह बर्बाद हो जाती है और कुएं-तालाब सूख जाते हैं और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध नहीं रहता। ऐसे में सरकार गिरते जलस्तर और फसलों के नुकसान का सर्वे (गिरदावरी) कराकर उस क्षेत्र को आधिकारिक रूप से ‘सूखाग्रस्त’ घोषित करती है। ये खबर भी पढ़ें राजस्थान- 10 साल के सबसे बड़े अकाल का खतरा:11 से ज्यादा जिले सूखे की चपेट में, 50% से कम बारिश, चलानी पड़ेगी पानी की ट्रेन