स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बिना MBBS डिग्री के डॉक्टर बने दो युवकों को शुक्रवार दोपहर गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों ने फेक डॉक्यूमेंट पेश कर राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) से डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन करवाया। हॉस्पिटल खरीदने के बाद 8वीं पास एक आरोपी फेक डिग्री और मार्कशीट से डॉक्टर बनकर ऑपरेशन तक करने लगा। एसओजी की ओर से गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही जांच में सामने आए 7 और आरोपियों को नामजद कर तलाश की जा रही है। एडीजी (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया- फेक एमबीबीएस डिग्री और डिप्लोमा इन गायनेकोलॉजी एवं ऑब्सेटेट्रिक्स लेकर राजस्थान में बने डॉक्टर्स के गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। मामले में पंकज यादव (30) निवासी थोई खंडेला सीकर और नानजी राम चौधरी (45) निवासी रानीवाड़ा जालोर को अरेस्ट किया गया है। इसके साथ ही फेक डॉक्टर्स शांतनु कुमार चारण, दीपक चौधरी, देवेन्द्र नेहरा, गीता कुमारी, महेश कुमार गुर्जर, सरीमूल मजूमदार और राम किशोर महावर के खिलाफ FIR दर्ज की गई। गिरफ्तार आरोपी पंकज यादव को हरियाणा के कैथल और आरोपी नानजी राम चौधरी को रानीवाड़ा जालोर से पकड़ा गया है। मामले में फरार 7 फेक नामजद आरोपियों की तलाश में एसओजी टीम दबिश दे रही है। एसओजी में दर्ज FIR हुई ट्रांसफर जयपुर के अशोक नगर थाने में 14 अक्टूबर को राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरिधरी गोपाल ने FIR दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में बताया कि कुछ लोगों की ओर से फेक डॉक्यूमेंट पेश कर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में डॉक्टर के रुप में रजिस्ट्रेशन करवा रखा है। रिपोर्ट में राजस्थान मेडिकल काउंसिल की ओर से प्रांरम्भिक जांच में संबंधित व्यक्तियों के नाम, जन्मतिथि, रजिस्ट्रेशन क्रमांक जारी होने की डेट सहित अन्य जानकारी दी गई। साथ ही इन लोगों के रजिस्ट्रेशन निरस्त किए गए। अशोक नगर थाना पुलिस की ओर से तुरंत जांच एसओजी को ट्रांसफर की गई। बिहार से बनाई फेक डिग्री की पेश एसओजी की जांच में सामने आया कि आरोपी पंकज यादव ने साल- 2013 से 2018 में कजाकिस्तान से MBBS की पढ़ाई की। इसके बाद उसने फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (FMG) की एग्जाम करीब 6 बार दी। वह पास नहीं हो सका। पूछताछ में सामने आया कि FMG में पास नहीं होने पर आरोपी पंकज यादव ने बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज की फेक MBBS डिग्री व मार्कशीट तैयार करवाई। इसके साथ ही बिहार मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन का फेक सर्टिफिकेट तैयार कर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पेश किया। उसके आधार पर रजिस्ट्रेशन करवाया गया। बिहार मेडिकल काउंसिल व मेडिकल कॉलेज से सत्यापन करवाने पर रजिस्ट्रेशन नहीं होने के साथ डिग्री व मार्कशीट का फेक होना पाया गया। डिप्लोमा फेक बनाकर किया पेश डिप्लोमा इन गायनेकोलॉजी एवं ऑब्सेटेट्रिक्स (DGO) की ओर से 2 साल का पोस्टग्रज्यूट डिप्लोमा होता है, जो MBBS ग्रेजुएट के लिए के लिए होता है। एसओजी जांच में सामने आया कि आरोपी नानंजी राम चौधरी की ओर से मुम्बई की कॉलेज से जारी डीजीओ डिप्लोमा से संबंधित डॉक्यूमेंट राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पेश कर रजिस्ट्रेशन करवाया गया था। संबंधित मेडिकल कॉलेज से सत्यापन करवाने पर आरोपी नानंजी राम के डीजीओ डिप्लोमा सर्टिफिकेट, अलॉटमेंट लेटर, पासिंग सर्टिफिकेट और अटेम्ट सर्टिफिकेट फेक पाए गए। एसओजी टीम ने आरोपी नानंजी राम चौधरी को रानीवाड़ा जालोर से पकड़ा। एसओजी मुख्यालय पर पूछताछ के बाद आरोपी को अरेस्ट किया गया। आरोपी नानंजी राम चौधरी रानीवाड़ा जालोर में स्थित भास्कर हॉस्पिटल का मालिक है। उसकी ओर से पेश की एज्यूकेशन सर्टिफिकेट व रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट की वास्तविकता, स्त्रोत और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में शामिल व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है। आरोपी की ओर से महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन से संबंधित फेक डॉक्यूमेंट तैयार कर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पेश किए गए। इसके आधार पर ही राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवाया गया। 8वीं पास कर बन गया हॉस्पिटल ऑनर एसओजी जांच में सामने आया है कि आरोपी नानंजी राम चौधरी केवल 8वीं क्लास पास है। इसके बावजूद उसने क्लास 10वीं ओर 12वीं की मार्कशीट आंध्रप्रदेश सेकेंडरी बोर्ड, MBBS डिग्री रामा यूनिवर्सिटी कानपुर और डीजीओ डिप्लोमा मुंबई के कॉलेज से लेकर पेश करना बताया है। साल-2010 में वह रानीवाड़ा में एक प्राईवेट डॉक्टर के क्लिनिक पर ओपीडी काउंटर पर पर्चीयां काटने का काम करता था। उसके बाद रानीवाड़ा में रेडिमेड कपड़ों की दुकान पर काम किया। तीन साल कपड़ों की दुकान पर काम करने के बाद साल-2014 में वह रानीवाड़ा स्थित राजदेव हॉस्पिटल में ओपीडी काउंटर पर पर्चियां काटने का काम करने लगा। साल-2015 में उसने हॉस्पिटल को उसके मालिक से खरीद लिया। साल 2016 में हॉस्पिटल का नाम बदलकर भास्कर हॉस्पिटल कर दिया। फेक डॉक्यूमेंट से बन गया डॉक्टर ओपनिंग के समय हॉस्पिटल में जनरल मेडीसिन के एक डॉक्टर की ओर से काम किया जाता था। साल-2019 में आरोपी नानजी ने हॉस्पिटल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर को भी नियुक्त किया। हॉस्पिटल में कार्यरत डॉक्टर्स के रजिस्ट्रेशन संबंधित कामों के सिलसिले में आरोपी को बार-बार राजस्थान मेडिकल काउंसिल के ऑफिस जाना पड़ता था। इस दौरान उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालिन पदाधिकारियों व कुछ कर्मचारियों से कॉन्टैक्ट कर खुद का डॉक्टर के रुप में पंजीयन करवाया। हॉस्पिटल को भी 100 बेड का बना डाला। इसके साथ डॉक्टर्स की टीम के साथ खुद भी ऑपरेशन करने लगा। संबंधित संस्था के सत्यापन के दौरान उक्त फेक डॉक्यूमेंट बनवाकर पेश किए। पदाधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की जांच गिरफ्तार दोनों आरोपियों ने पूछताछ के दौरान कथित रुप से कुछ व्यक्तियों की ओर से फेक डॉक्यूमेंट तैयार करवाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पेश कर डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन करवाना बताया है। एसओजी की ओर से राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
