न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं और लाचारी का खामियाजा एक बार फिर एक प्रसूता को भुगतना पड़ा। निमोदा हरीजी निवासी 30 साल की अनीता बैरवा (पत्नी हंसराज) को 13 अक्टूबर को मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती किया गया था। महिला के रिश्तेदार श्याम लाल ने बताया कि 14 अक्टूबर को सुबह 11 बजे अनीता का सिजेरियन के जरिए प्रसव कराया गया था। 15 अक्टूबर तड़के करीब 5 बजे अचानक मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी और यूरिन बनना बंद हो गया। कुछ देर बाद महिला की प्लेटलेट्स तेजी से गिरती पाई गईं, जिसके लिए डॉक्टरों ने तत्काल सिंगल डोनर प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह दी। मरीज के परिजनों को प्लेटलेट्स की व्यवस्था के लिए एमबीएस अस्पताल स्थित ब्लड बैंक भागना पड़ा। इधर, मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल से एमबीएस अस्पताल आने जाने में मरीज के परिजनों को समय भी लगा। क्योंकि मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में प्लेटलेटस ही नहीं मिल सकी। यहां मशीन खराब पड़ी होने के चलते प्लेटलेटस की उपलब्धता नहीं हो सकी। इधर, मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। बाद में महिला की हालत को देखते हुए सुपर स्पेशियलिटी के नेफ्रोलॉजी विभाग में शिफ्ट किया गया।