जैसलमेर/लाठी. मरुस्थलीय जैसलमेर में जल संरक्षण की प्राचीन परंपरा और ऐतिहासिक जल स्रोतों की समृद्ध विरासत पर हुए शोध ने इनके संरक्षण की जरूरत को रेखांकित किया है। जिले के दामोदरा गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में इतिहास विषय के शिक्षक दिलीप कुमार सैनी और इतिहासकार एवं पर्यावरणविद् पार्थ जगाणी का शोध पत्र प्रकाशित हुआ है। शोध में 9वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान जैसलमेर क्षेत्र में निर्मित जल संरचनाओं की ऐतिहासिकता का अध्ययन किया गया है। इसमें करीब 42 तालाबों, खड़ीनों, कुओं और जलकुंडों से जुड़े गोवर्धन शिलालेखों पर अंकित स्थापना वर्ष तथा प्राचीन ग्रंथों में उपलब्ध विवरणों का मिलान कर उनके निर्माण काल और ऐतिहासिक महत्व को सामने रखा गया है।
