राजस्थान में जोजरी-बांडी-लूणी नदी के प्रदूषण और संरक्षण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा- नदी तंत्र को प्रभावित करने वाली समस्याएं केवल व्यक्तिगत औद्योगिक इकाइयों के उल्लंघन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे अपर्याप्त उपचार क्षमता, अवैध औद्योगिक गतिविधियां, भूमि उपयोग में अनियमितताएं और प्रभावी निगरानी की कमी जैसी व्यापक समस्याएं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नदी के पास बने इंडस्ट्री एरिया को भी किसी और जगह ट्रांसफर करने के लिए आकलन करने को कहा। इतना ही नहीं रेजिडेंशियल और एग्रीकल्चर जमीन पर संचालित होने वाली अवैध इंडस्ट्री यूनिट के पूरे नेटवर्क की जांच करने के लिए भी कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन अवैध या अनधिकृत डिस्चार्ज पॉइंट, बाइपास व्यवस्था, मैनहोल, चैंबर, पाइपलाइन और नालियों की पहचान कर उन्हें हटाने की अनुमति दी जा चुकी है। उन्हें बिना देरी सील, इंटरसेप्ट या हटाया जाए। इसके लिए व्यापक सर्वे पूरा होने का इंतजार नहीं किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को मौके पर कार्रवाई का भौतिक सत्यापन कर प्रत्येक 15 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट समिति के सामने पेश करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।