कई लोगों के लिए पुरानी बैटरी सिर्फ कचरा है। लेकिन कमलेश जैन ने इसी कबाड़ में कारोबार की बड़ी संभावना देखी। साल 2013 में परिवार के मेटल कारोबार से जुड़े कमलेश ने समझा कि इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों में मौजूद सीसा दोबारा इस्तेमाल होने वाला कीमती कच्चा माल है। यही सोच आगे चलकर Jain Resource Recycling के कारोबार की नींव बनी।
