भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां (BKU Ugrahan) ने सोमवार को तरनतारन स्थित उपायुक्त (DC) कार्यालय के बाहर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार रोष प्रदर्शन और धरना दिया। यह प्रदर्शन भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते के विरोध, लैंड पूलिंग पॉलिसी को रद्द करने, किसानों को जमीनों के मालिकाना हक वापस देने और किसानों-मजदूरों की पूर्ण कर्जमाफी जैसी प्रमुख मांगों को लेकर आयोजित किया गया था। धरने को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष गुरबाज सिंह सिद्धवां, भूपिंदर सिंह ठट्ठियां, हरदीप सिंह जोड़ां, सुखवंत सिंह वल्टोहा, सुलखण सिंह मंडाला और संतोष सिंह पट्टी ने पंजाब सरकार से मांग की कि लैंड पूलिंग पॉलिसी को तुरंत खत्म किया जाए और किसानों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक बहाल किया जाए। किसानों की प्रमुख मांगे कर्जमाफी व सख्त कानून: किसानों और मजदूरों का संपूर्ण कर्ज माफ किया जाए तथा सूदखोरी पर लगाम कसने के लिए कड़ा कानून बनाया जाए। मुआवजा व सरकारी नौकरी: आत्महत्या कर चुके पीड़ित किसान परिवारों को तुरंत आर्थिक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। मामले रद्द हों: पराली जलाने के आरोपों सहित किसानों पर दर्ज सभी पुलिस केस तुरंत प्रभाव से रद्द किए जाएं। पानी का विवाद: नदी जल बंटवारे के मुद्दे पर राज्यों के किसानों को आपस में लड़ाने की साजिशें बंद हों और इसे विशेषज्ञों की मदद से सुलझाया जाए।
‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कृषि और उद्योग को करेगा तबाह’ किसान नेता इंद्रजीत सिंह माड़ीमेघा ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता भारतीय कृषि क्षेत्र को पूरी तरह तबाह कर देगा। इसका सीधा असर देश के छोटे उद्योग और खुदरा बाजार पर भी पड़ेगा, जिससे बेरोजगारी और महंगाई चरम पर पहुंचेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिजली क्षेत्र के निजीकरण के लिए बिजली संशोधन विधेयक-2025 और फसलों के बीजों का कारोबार कॉरपोरेट घरानों को सौंपने के लिए बीज संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है। एक तरफ जहां कॉरपोरेट घरानों के लाखों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए जा रहे हैं, वहीं गलत नीतियों के कारण किसान और मजदूर कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। बाढ़ मुआवजे और मनरेगा की मांग धरने के दौरान किसान नेताओं ने पिछले वर्ष आई बाढ़ से किसानों और मजदूरों को हुए जान-माल के नुकसान का उचित मुआवजा देने और मनरेगा कानून को पूरी तरह बहाल कर साल में कम से कम 200 दिन रोजगार की गारंटी देने की पुरजोर मांग की। इस रोष प्रदर्शन के दौरान बलविंदर सिंह लाडी, सोहन सिंह सभरा, करमजीत सिंह सभरा, तरसेम सिंह, जसवंत सिंह सोहल, सतबीर सिंह सहित विभिन्न जिलों व ब्लॉकों के अध्यक्ष, सचिव और बड़ी संख्या में किसान-मजदूर मौजूद रहे।
