राजस्थान के 3 नगर निगम जयपुर, जोधपुर और कोटा में बीजेपी और कांग्रेस ने अपने मेयर प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतार दिए हैं। सभी ने शनिवार को नामांकन दाखिल किया। इनमें कोटा की अनुसुईया गोस्वामी भी शामिल हैं। जो एक अधिकारी को थप्पड़ मारकर चर्चा में रह चुकी हैं। वहीं, जयपुर में बीजेपी से मेयर के उम्मीदवार सुनील कोठारी को कभी जयपुर जिलाध्यक्ष का पद कुछ महीनों में ही छोड़ना पड़ा था। वे अपनी कार्यकारिणी नहीं बना पाए थे। जयपुर के भाजपा और कांग्रेस के मेयर उम्मीदवारों की प्रोफाइल जयपुर में बीजेपी ने सुनील कोठारी को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। सुनील कोठारी को कभी जयपुर जिलाध्यक्ष का पद कुछ महीनों में ही छोड़ना पड़ा था। दरअसल, सुनील कोठारी को जनवरी 2020 में जयपुर शहर बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन वे अपनी कार्यकारिणी नहीं बना पाए थे। वे अपने सरल और सौम्य स्वभाव के कारण सभी गुटों को एक मंच पर नहीं ला पाए थे। जिससके चलते उनकी कार्यकारिणी में देरी हुई थी। ऐसे में अगस्त 2020 में ही उनसे इस्तीफा ले लिया गया था। इसके बाद करीब ढाई साल तक वे राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे। साल 2023 में हुए विधानसभा चुनावों में उन्हें एक बार फिर प्रदेश स्तरीय चुनाव प्रबंधन समिति और प्रदेश स्तरीय आर्थिक समिति का सदस्य बनाया गया। वहीं अब एक बार फिर पार्टी ने उन पर विश्वास जताते हुए उन्हें मेयर पद का प्रत्याशी बनाया हैं। गहलोत सरकार के फैसले के खिलाफ चलाया आंदोलन सुनील कोठारी राजनीति के साथ-साथ सामाजिक कार्यों मे भी हमेशा आगे रहे। साल 2023 में जब गहलोत सरकार ने प्रदेश में 17 नए जिले बनाते हुए जयपुर को दो जिलों में तोड़ने का निर्णय लिया। तब कोठारी ने ‘म्हारा जयपुर, प्यारा जयपुर, हमें चाहिए एक जयपुर’ अभियान चलाया। उन्होने सामाजिक संगठनों और जयपुर की जनता को साथ लेकर गहलोत सरकार के इस फैसले का विरोध भी किया। उन्होने संकल्प लिया था कि यह फैसला टलने पर वह सांगा बाबा मंदिर सांगानेर से शिला माता मंदिर आमेर तक पद यात्रा निकालेंगे। प्रदेश में सरकार बदलने और फैसला लागू नहीं होने पर उन्होने 4 फरवरी 2024 को पदयात्रा निकालकर संकल्प को पूरा किया। मावर कांग्रेस का प्रमुख ओबीसी चेहरा कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी सुनीता मावर जयपुर के आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 118 से कांग्रेस पार्षद हैं। वे पिछली बार भी मेयर की दावेदार थीं,लेकिन पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया था। वह पिछले 20 साल से ज्यादा वक्त से जयपुर नगर निगम की राजनीति में सक्रिय हैं। नगर निगम में कई समितियों की अध्यक्ष रह चुकी हैं। जयपुर शहर में कांग्रेस का प्रमुख महिला ओबीसी चेहरा हैं। कांग्रेस में भारी गुटबाजी के बीच सुनीता मावर को कांग्रेस का मेयर उम्मीदवार बनाने के पीछे सियासी समीकरण है। मावर लंबे समय से नगर निगम की राजनीति में सक्रिय हैं। शहरी वोटर्स पर पकड़ के साथ उनका ग्राउंड कनेक्ट अच्छा माना जाता है। जातीय समीकरणों में फिट बैठती हैं। ओबीसी और वैश्य समाज दोनों के सियासी समीकरण सधते हैं। मावर लगातार पार्टी से जुड़ी रही हैं। (पूरी खबर पढ़ें) जोधपुर के मेयर उम्मीदवारों की प्रोफाइल जोधपुर में बीजेपी के मेहता संघ में कार्यकर्ता रहे जोधपुर में बीजेपी के मेयर उम्मीदवार प्रसन्नचंद मेहता पिछले 49 साल से संगठन से जुड़े हुए हैं। सन् 1977 में एबीवीपी से राजनीति की शुरुआत की थी। इसके बाद संघ और संगठन में भागीदारी बढ़ती गई। भारतीय जनता युवा मोर्चा की शुरुआत हुई तो प्रसन्नचंद मेहता भी जुड़ गए। इस दौरान वे जोधपुर भाजयुमो के पहले जिलाध्यक्ष बने। इसी के साथ सक्रिय राजनीति में उनकी एंट्री हुई। जोधपुर के युवाओं को भाजयुमो से जोड़ने का काम किया। घर-घर जाकर संगठन को लेकर चर्चा की। इसके साथ ही बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ा। इस भागीदारी को देखते हुए 90 के दशक में उन्हें बीजेपी जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी गई। प्रसन्नचंद मेहता बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं। जब सतीश पूनिया प्रदेशाध्यक्ष थे, तब मेहता प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर रहे। वे पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के करीबी माने जाते हैं। संघ में सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर लगातार वे सक्रिय रहे। कांग्रेस के सोलंकी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 में हुई कांग्रेस के मेयर कैंडिडेट राजेंद्र सिंह सोलंकी की राजनीतिक यात्रा 1970 के दशक में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुई थी। वे 1975 में जोधपुर युवक कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने। इसके बाद 1982 में पहली बार पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत ​हासिल की। 1993 के विधानसभा चुनाव में सरदारपुरा विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी ने उन्हें हराया। सोलंकी अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबियों में शुमार रहे हैं। साल 1993 में जोधपुर में पानी संकट को लेकर कांग्रेस की तरफ से जन आंदोलन चलाया गया था। इसमें राजेंद्र सिंह सोलंकी कांग्रेस नेता जुगल काबरा के साथ जेल गए और 8 दिन जेल में रहे। इसके बाद जब 1998 में कांग्रेस सरकार बनी तो अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने। साल 2002 में सोलंकी को जोधपुर नगर विकास न्यास (यूआईटी) का चेयरमैन बनाया गया। गहलोत सरकार के दूसरे कार्यकाल में वे 2011 में जोधपुर विकास प्राधिकरण के चेयरमैन बनाए गए। सोलंकी 2014 में एक बार फिर निगम चुनाव मैदान में उतरे और पार्षद बने। इसके बाद वे नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चुने गए। साल 2018 में राजस्थान में हुए विद्यानसभा चुनाव में कांग्रेस विजयी हुई। अशोक गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। फिर साल 2022 में सोलंकी को पशुधन विकास बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया। इस बार निगम चुनाव उन्होंने सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र के वार्डों में चुनवा अभियान की जिम्मेदारी संभाली। जोधपुर लोकसभा चुनाव में 1989,1991,1996 और 1996 मुख्य चुनवा प्रभारी रहे। (पढ़ें पूरी खबर) कोटा के मेयर उम्मीदवारों की प्रोफाइल कोटा में थप्पड़ मारकर चर्चा में आई अनुसुईया बीजेपी उम्मीदावर कोटा में बीजेपी ने अनुसुईया गोस्वामी को मेयर उम्मीदवार बनाया है। अनुसुईया गोस्वामी सालों पहले केशवपुरा में एक अधिकारी को थप्पड़ मारकर चर्चा में आई थीं। अनुसुईया गोस्वामी का बीजेपी संगठन में लंबा इतिहास रहा है। वे राजस्थान बीजेपी में प्रदेश मंत्री के रूप में राज्य स्तरीय जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं। इसके अलावा कोटा में महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष के रूप में उन्होंने लंबे समय तक जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने और पार्टी के अभियानों का नेतृत्व करने का काम किया है। अनुसुईया गोस्वामी का परिवार दशकों से बीजेपी की विचारधारा के साथ जुड़ा हुआ है। भाभी भी रहीं पार्षद पिछले बोर्ड में उनकी भाभी रेखा गोस्वामी पार्षद रह चुकी हैं, जिससे उनके परिवार की निकाय चुनाव और शहरी राजनीति पर पहले से ही अच्छी समझ है। राजनीतिक रिश्तों की बात करें तो बूंदी के पूर्व विधायक अशोक डोगरा उनके समधी हैं। इस नाते हाड़ौती अंचल के राजनीतिक गलियारों में उनके परिवार की अच्छी-खासी साख है। सेकेंडरी तक पढ़ी हैं, एक करोड़ संपत्ति अनुसुईया गोस्वामी सेकेंडरी तक पढ़ी हुई हैं। कुल संपत्ति एक करोड़ है। अनुसुईया के सामने कांग्रेस ने युवा चेहरा आयुष पारेता को उतारा था। अनुसुईया को 1551 वोट मिले थे, जबकि आयुष को 1158 वोट मिले थे। चुनाव जीतने के बाद ही उनका नाम मेयर के लिए चर्चाओं में था। परिवार में चार बच्चे हैं। इनमें तीन बेटियां और एक बेटा है। (पढ़ें पूरी खबर) ये भी पढ़ें… जैन होने से अटका था सुनील-कोठारी का नाम,फिर फायदा मिला:बागियों को मनाने के लिए कांग्रेस ने खेला कार्ड; कोटा में ऐनवक्त पर तय हुआ मेयर का नाम