राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के बढ़े हुए आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। चुनाव प्रक्रिया के लिए जारी अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार अग्रवाल और न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को तय की है। याचिकाकर्ता कमलेश कुमार ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 15(5), 15(6) और 16(5) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। इसके साथ ही ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की 10 अगस्त और 13 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि इन अधिसूचनाओं के आधार पर जिला कलेक्टरों और उपखंड अधिकारियों को आरक्षण तय करने के निर्देश दिए गए थे। 13 अगस्त को लॉटरी के जरिए पंचायती राज चुनाव 2026 के लिए सीटों का निर्धारण किया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि जिलों में जिला प्रमुख और प्रधान पदों पर SC-ST वर्ग के साथ-साथ महिलाओं के लिए करीब 50 प्रतिशत आरक्षण तय किया गया है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 243-डी का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान है। इससे ज्यादा आरक्षण देने की राज्य की शक्ति संविधान के हिसाब से होनी चाहिए। कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान एएजी राजेश पंवार और पवन भारती ने संबंधित प्रतिवादियों की ओर से नोटिस स्वीकार किया।
