राजस्थान में बिना पार्षद बने भी निकाय प्रमुख बन सकते हैं। वोटर बिना चुनाव लड़े-जीते भी मेयर, सभापति और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ सकता है। प्रदेश में चल रहे निकाय चुनावों में 13 जगह से ऐसे ही प्रत्याशी मेयर,चेयरमैन और पालिकाध्यक्ष की दावेदारी कर रहे हैं। दरअसल, कांग्रेस सरकार के समय 2019 में राजस्थान नगर पालिका निर्वाचन नियम 1994 में बदलाव कर गैर पार्षद के भी निकाय प्रमुख बनने का प्रावधान लागू किया था। इसे हाइब्रिड फॉर्मूले का नाम दिया गया था। कांग्रेस राज में लागू हुआ यह प्रावधान अब भी बरकरार है। पहले मेयर, सभापति और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव केवल पार्षद ही लड़ सकते थे। गैर पार्षद निकाय प्रमुख नहीं लड़ सकते थे। कांग्रेस राज में पुराने नियमों को बदलकर इसका प्रावधान किया गया थे। सचिन पायलट ने किया था विरोध गहलोत सरकार ने अक्टूबर 2019 में जिस वक्त हाइब्रिड फॉर्मूले के तहत गैर पार्षदों को निकाय प्रमुख बनाने का प्रावधान लागू किया, उसके कुछ समय बाद ही निकाय चुनाव हुए थे। गहलोत सरकार में उस वक्त सचिन पायलट डिप्टी सीएम और ग्रामीण विकास पंचायतीराज और पीडब्ल्यूडी मंत्री थे। सचिन पायलट ने इस फैसले का खुलकर विरोध करते हुए कहा था कि गैर पार्षदों को निकाय प्रमुख बनाने का प्रावधान लागू करने से पहले कैबिनेट में हमसे चर्चा नहीं की गई, इससे बैकडोर एंट्री को बढ़ावा मिलेगा, यह गलत है। सचिन पायलट समर्थक कई नेताओं ने भी इस प्रावधान पर सवाल उठाए थे। इस विरोध के बावजूद गहलोत सरकार ने इसे वापस नहीं लिया था। बीजेपी ने विपक्ष में रहते सवाल उठाए, लेकिन सरकार बनने पर प्रावधान बरकरार रखा बीजेपी सरकार ने उस वक्त गहलोत सरकार के इस प्रावधान पर सवाल उठाए थे, लेकिन अब सरकार बनने के बाद इसे बरकरार रखा है। मौजूदा सरकार ने शहरी निकाय और पंचायतीराज चुनाव में दो से ज्यादा बच्चों के प्रावधान को हटा दिया है। पहले दो से ज्यादा बच्चों वाले पार्षद और निकाय प्रमुख का चुनाव नहीं लड़ सकते थे। कौन नहीं लड़ सकता निकाय प्रमुख का चुनाव राजस्थान नगर पालिका निर्वाचन नियमों के प्रावधानों के अनुसार सासंद, विधायक, जिला प्रमुख, प्रधान, सरपंच, वार्ड पंच, जिला परिषद मेंबर, पंचायत समिति मेंबर शहरी निकाय प्रमुखों का चुनाव नहीं लड़ सकते। मेयर, सभापति, अध्यक्ष के लिए देनी होती है जमानत राशि मेयर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए नामांकन फॉर्म के साथ जमानत राशि जमा करवानी होती है। तीनों के लिए अलग-अलग जमानत राशि तय है। ……….. ये खबर भी पढ़ें… दो-निगमों में कांग्रेस का बिगड़ा खेल,विधायक के भाई को पीटा:अलवर, अजमेर, भरतपुर में निर्दलीयों की मान-मनोव्वल; 5 जगह भाजपा की निर्विरोध जीत तय राजस्थान में बुधवार को 305 निकायों में मेयर, चेयरमैन और पालिकाध्यक्ष के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो गई। पाली-बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस का खेल बिगड़ गया। अलवर, अजमेर, भरतपुर में भाजपा-कांग्रेस निर्दलीयों की मान-मनोव्वल में जुटी है। वहीं 5 नगर पालिकाओं में भाजपा की निर्विरोध जीत तय हो गई। पूरी खबर पढ़ें…
