जोधपुर के मथुरादास माथुर हॉस्पिटल में 15 मिनट में हार्ट का ऑपरेशन कर मरीज की जान बचाई गई। इतने कम समय में मरीज के एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी दोनों की गई। खास बात ये थी कि इस दौरान मरीज वेंटिलेटर पर था। मरीज को सीपीआर और हाई शॉक देकर दिल की धड़कनो को लौटाया गया। नागौर से रेफर हुआ था, सीसीयू में शिफ्ट करते ही हार्ट अटैक आया एमडीएम हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. रोहित माथुर ने बताया- 7 सितंबर को 41 साल के युवक को एक्सीडेंट होने के बाद नागौर से रेफर किया गया था। सड़क हादसे में पसलियों में फ्रैक्चर होने से उसे खून पतला करने वाला इंजेक्शन नहीं दिया जा सका। घटना के साढ़े 3 घंटे बाद वह एमडीएम इमरजेंसी पहुंचा। कार्डियक केयर यूनिट (सीसीयू) में आते ही मरीज को कार्डियक अरेस्ट (हार्ट अटैक) हो गया। सीपीआर और शॉक देकर लौटाई दिल की धड़कन डॉ. रोहित माथुर ने बताया- सीसीयू टीम ने तुरंत सीपीआर के साथ इंट्यूबेट कर शॉक दिया। काफी मशक्कत के बाद दिल की धड़कन वापस आई, लेकिन स्थिति बेहद गंभीर थी। इस दौरान मरीज कोमा में था। इसके साथ ही पुतलियां फैली हुई, बीपी रिकॉर्ड नहीं हो रहा था और इको में हार्ट सिर्फ 10-15% ही काम कर रहा था। मरीज को वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर किया ऑपरेशन डॉक्टर रोहित माथुर ने बताया- आमतौर पर ऐसी स्थिति में सिर्फ सपोर्टिव इलाज दिया जाता है, लेकिन टीम ने भरोसा दिखाते हुए रेस्क्यू एंजियोप्लास्टी का फैसला लिया। मरीज को वेंटिलेटर पर ही कैथ लैब शिफ्ट किया गया। लैब में भी उसे बार-बार खतरनाक वीटी/वीएफ हुआ, जिसके लिए शॉक देना पड़ा। जांच में दिल की मुख्य धमनी एलएडी 100% बंद मिली। टीम ने मात्र 15 मिनट के अंदर एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी कर धमनी को खोल दिया। 3 दिन बाद हटाया वेंटिलेटर, 10 दिन बाद हॉस्पिटल से मिली छुट्टी डॉक्टर रोहित माथुर ने बताया 41 साल युवक को हार्ट अटैक के बाद कार्डियक अरेस्ट होने के बावजूद नया जीवन मिला। इस ऑपरेशन के बाद मरीज वेंटिलेटर और हाई-डोज दवाओं पर रहा। उन्होंने बताया कि मरीज के पास आरजीएचएस कार्ड नहीं था। इस पर हॉस्पिटल सुप्रीटेंडेंट डॉ. विकास राजपुरोहित की सहमति पर पूरा इलाज फ्री में किया गया। इस दौरान टीम में डॉ. राकेश करणावत, डॉ. भरत व उनकी एनेस्थीसिया टीम और कार्डियोलॉजी के डीएम रेजिडेंट्स और पूरे नर्सिंग टीम का भी सहयोग रहा।
