जयपुर नगर निगम चुनाव-2026 में नामांकन वापसी के बाद चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। 150 वार्डों में अब कुल 723 उम्मीदवार चुनाव मैदान में रह गए हैं, जबकि 281 प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिया। नाम वापसी के बाद जहां 17 वार्डों में दो उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर है, वहीं 35 वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। बड़ी संख्या में बागियों के चुनाव मैदान से हटने के बाद भाजपा और कांग्रेस को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन कई वार्डों में अब भी पार्टी से नाराज नेता और निर्दलीय उम्मीदवार अधिकृत प्रत्याशियों का गणित बिगाड़ रहे हैं। विद्याधर नगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के बागियों को मनाने की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने संभाली। उन्होंने गुरुवार को एक दर्जन से ज्यादा नाराज नेताओं और बागी दावेदारों से बातचीत कर उन्हें नाम वापस लेने के लिए मनाया। इनमें सबसे ज्यादा छह बागी प्रत्याशी वार्ड नंबर-3 से बताए जा रहे हैं। इस वार्ड में भाजपा ने भवानी शंकर शर्मा को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस की ओर से छगन कुलदीप चुनाव मैदान में हैं। बागियों के नाम वापस लेने के बाद यहां भाजपा को बड़ी राहत मिली है। वार्ड नंबर-16 में भी भाजपा के लिए राहत की खबर रही। निवर्तमान पार्षद दिनेश कावट ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। वहीं महिपाल सिंह शेखावत ने भी चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया। बताया जा रहा है कि महिपाल को उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने अपने आवास पर बुलाकर समझाइश की, जिसके बाद उन्होंने पार्टी के प्रति समर्पण जताते हुए नाम वापस ले लिया। हालांकि, दिनेश कावट के नाम वापस लेने के बावजूद वार्ड नंबर-8 में उनकी पत्नी मंजू शर्मा चुनाव मैदान में बनी हुई हैं, जिससे वहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। नाम वापसी के बाद भी कई वार्डों में बागियों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की टेंशन बरकरार रखी है। विद्याधर नगर क्षेत्र के वार्ड नंबर-15 में तरुण खटोड़ चुनावी मैदान में डटे हुए हैं और उनकी मौजूदगी से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। इसी तरह वार्ड नंबर-50 में कांग्रेस के लिए विक्रम वाल्मीकि बागी उम्मीदवार के रूप में चुनौती बने हुए हैं। वार्ड नंबर-77 में सेमी निवर्तमान चेयरमैन रमेश सैनी मैदान में हैं और मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं। वार्ड नंबर-81 में भाजपा की बागी स्वाति परनामी पार्टी के लिए परेशानी खड़ी कर रही हैं। वहीं वार्ड नंबर-101 में मनोज मुद्गल की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। यहां वे भाजपा और कांग्रेस दोनों के अधिकृत प्रत्याशियों को चुनौती दे रहे हैं। इसी तरह वार्ड नंबर-110 में भाजपा की बागी बीना मेठी मैदान में हैं और मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। वार्ड नंबर-121 में महेश ठाकुर की मौजूदगी से भी चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है और यहां त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति बनती नजर आ रही है। भाजपा को कुछ अन्य वार्डों में भी बागियों के हटने से राहत मिली है। पार्टी के पूर्व महामंत्री अरुण खटोड़ ने वार्ड नंबर-104 से अपना नामांकन वापस ले लिया। वहीं पूर्व चेयरमैन राजेश गुप्ता ने वार्ड नंबर-135 से चुनावी मैदान छोड़ दिया। राजेश गुप्ता के नाम वापस लेने के बाद भाजपा प्रत्याशी विमल अग्रवाल को बड़ी राहत मिली है। अब नामांकन वापसी के बाद चुनावी मुकाबला अंतिम रूप ले चुका है। कहीं भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है तो कई वार्डों में निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। ऐसे वार्डों में वोटों का बंटवारा चुनाव परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।