सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। इससे अधिवक्ताओं में खुशी है। हालांकि उन्होंने 6 सितंबर तक न्यायिक कार्यों का बहिष्कार जारी रखने का फैसला किया है। अधिवक्ताओं का यह विरोध राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता की ओर से लिखे गए पत्रों के बाद शुरू हुआ था। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन ने 6 सितंबर तक न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। हड़ताल के दूसरे दिन अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों से दूरी बनाए रखी। उन्होंने हाईकोर्ट परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन अध्यक्ष रणजीत जोशी और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन अध्यक्ष दिलीप सिंह उदावत के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट की मुख्य पीठ परिसर में प्रदर्शन किया। सुंदरकांड का किया पाठ हाईकोर्ट भवन में करीब तीन घंटे तक सुंदरकांड पाठ किया गया। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की सिफारिश पर अधिवक्ताओं ने एक-दूसरे को लड्डू खिलाकर खुशी भी जताई। अधिवक्ताओं ने बताया कि लंबे समय से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की कार्यप्रणाली को लेकर चिंताएं थीं। विभिन्न स्तरों पर अपनी बात रखने के बावजूद समाधान नहीं होने पर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। कॉलेजियम की ओर से नए मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश को अधिवक्ता आंदोलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं। अधिवक्ताओं ने कहा कि हाईकोर्ट न्याय का मंदिर है और इसकी गरिमा व सुरक्षा सबसे जरूरी है। इसी भावना के साथ भवन की सुरक्षा और सकारात्मक माहौल की कामना को लेकर सुंदरकांड पाठ कराया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद पुरोहित ने कहा कि कॉलेजियम की सिफारिश से लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध के समाधान का रास्ता खुला है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर अधिवक्ता भविष्य में भी आवाज उठाते रहेंगे।
