राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बेंच ने पिता की मौत के करीब 21 साल बाद बेटे को अनुकंपा नियुक्ति देने के आदेश दिए हैं। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश उमेश सिंह की अपील पर दिए। अदालत ने सेंट्रल इलेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट पिलानी को आदेश दिए कि वह तुरंत प्रभाव से अनुकंपा नियुक्ति दें। अदालत ने कहा- तकनीकी कारणों को अनुकंपा नियुक्ति से इनकार करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। ऐसा करने से इस तरह की योजना का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। विशेष रूप से जब परिवार की अत्यधिक गरीबी साफ दिखाई दे रही हो। पिता की मौत के समय ढाई साल का था बेटा याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता के पिता संस्थान में तकनीशियन पद पर थे। नौकरी में रहने के दौरान 3 मार्च 2005 को उनकी मौत हो गई। उस समय अपीलार्थी ढाई साल का बच्चा था। ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसके दादा-दादी पर आ गई। वहीं बाद में दादा का भी निधन हो गया। अपीलार्थी के बालिग होने पर उसने 27 जुलाई 2020 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन संस्थान ने उसका आवेदन देरी के आधार पर खारिज कर दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं अपील में कहा गया कि संस्थान के अधिकारियों ने मौखिक रूप से पहले आश्वासन दिया था कि बालिग होने पर उसे नौकरी देने पर विचार किया जाएगा। परिवार में पांच बहनों में से दो का विवाह हो चुका है और एक बहन दिव्यांग है। बहनों ने अपीलार्थी के लिए खुद नौकरी लेने से मना कर दिया था। ऐसे में उसे अनुकंपा नियुक्ति दिलाई जाए, जिसका विरोध करते हुए संस्थान के वकील ने कहा- 15 साल बीतने के बाद अनुकंपा नौकरी पर विचार नहीं किया जा सकता। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक है और उन्हें पेंशन व ग्रेच्युटी भी मिली है। कर्मचारी की मौत के समय तीन बहनें नौकरी के लिए योग्य थी, लेकिन उन्होंने आवेदन नहीं किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपीलार्थी को अनुकंपा नियुक्ति देने के आदेश दिए हैं।
