धौलपुर में बुधवार को एक ही दिन में एक साथ 6 अर्थियां उठी। इससे पूरा शहर रो पड़ा। यह अर्थियां चंबल नदी किनारे स्थित मुक्तिधाम पहुंचीं तो वहां मौजूद हर आंख नम थी। पूरे शहर में शोक का माहौल छा गया। एक घर तो अब कोई महिला ही नहीं बची है। अंतिम संस्कार ने दौरान बेटे ने पिता को कांपते हाथों से मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई के इस दृश्य ने पूरे शहर को गम में डुबो दिया। इसके साथ ही शहर के लोगों को 29 साल पुराना हादसा फिर याद आ गया, जिसमे एक साथ 6 लोगों की मौत हुई थी और तब भी 6 लोगों की एक साथ अर्थियां उठी थी। महाकाल के दर्शन करने जा रहा था परिवार
दरअसल मंगलवार को 2 अलग-अलग सड़क हादसों में धौलपुर में 6 लोगों की मौत हो गई थी।
मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकाल दर्शन के लिए जा रहे पुरानी सब्जी मंडी क्षेत्र के त्रिवेदी परिवार की कार डंपर से टकरा गई। इस हादसे में कपड़ा व्यवसायी सुनील त्रिवेदी की पत्नी सोमा (65), बेटा अंकुर (42) और बहू अर्चना (40) की जान चली गई। तीनों के शव पोस्टमॉर्टम के बाद देर रात धौलपुर लाए गए। बुधवार सुबह त्रिवेदी परिवार के घर से जब तीनों की अंतिम यात्रा निकली, तो बड़ी संख्या में रिश्तेदार और परिचित वहां मौजूद थे। चंबल मुक्तिधाम में सुनील त्रिवेदी ने अपनी पत्नी सोमा को मुखाग्नि दी। उनके छोटे बेटे रत्नेश ने अपने भतीजे अंश के साथ अंकुर और अर्चना का अंतिम संस्कार किया। 29 साल पहले भी उठी थी एक साथ 6 अर्थियां
धौलपुर के इतिहास में 12 अक्टूबर 1997 का दिन आज भी एक दर्दनाक हादसे के रूप में याद किया जाता है। जयपुर के पास टाटा सूमो पलटने से हनुमान तिराहे पर रहने वाले तिवारी परिवार के 6 लोगों की मौत हो गई थी। उस हादसे के करीब 29 साल बाद मंगलवार को धौलपुर ने फिर वैसा ही कलेजा चीर देने वाला दृश्य देखा। पिता और भाई को संभालने पहुंची बेटियां
त्रिवेदी परिवार पर हादसे ने ऐसा कहर बरपाया कि घर की दोनों बहुएं अब नहीं रहीं। परिवार में सुनील त्रिवेदी, उनके छोटे बेटे रत्नेश और दोनों पोते अंश व तेजस रह गए हैं। इस अचानक आई त्रासदी ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया। बेटियों के लिए मां और भाभी को खोने का दर्द असहनीय था। वे भी पिता और भाइयों को संभालने के लिए धौलपुर पहुंचीं। इस घर में जहां 2 दिन पहले महाकाल के दर्शन और यात्रा की खुशियां थीं, वहां अब मातम और सिसकियां पसरी हुई है। दूसरे हादसे ने भी बुझा दिए 3 चिराग
इधर धौलपुर-भरतपुर हाईवे पर हुए दूसरे सड़क हादसे ने जैन परिवार को भी गहरा जख्म दे दिया। जयपुर के पदमपुरा स्थित श्रीजी के दर्शन कर लौट रहे सरिया व्यवसायी राजकुमार जैन, उनके भतीजे और तेल व्यवसायी विजय जैन और विजय जैन के बेटे आदी जैन की सड़क हादसे में मौत हो गई। तीनों के शव जब घरों में पहुंचे तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। घरों से उठती चीखों ने आसपास के लोगों को भी झकझोर दिया। अंतिम यात्रा चंबल मुक्तिधाम पहुंची तो बड़ी संख्या में शहरवासी अपने परिचितों को अंतिम विदाई देने उमड़ पड़े। बेटे ने पिता को कांपते हाथों से दी मुखाग्नि
सरिया व्यवसायी राजकुमार जैन के अंतिम संस्कार का सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया जब उनके बेटे मयंक ने अपने पिता को कांपते हाथों से मुखाग्नि दी। जिस पिता की उंगली पकड़कर मयंक ने जीवन की राह सीखी, उसी पिता को मुखाग्नि देने की घड़ी ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। वहीं विजय जैन और उनके बेटे आदी जैन का अंतिम संस्कार विजय जैन के बड़े बेटे ने किया। एक के बाद एक उठती अर्थियां, परिजनों की सिसकियां और चंबल किनारे जलती चिताओं के बीच धौलपुर ने 6 अपनों को अंतिम विदाई दी। दो हादसे, 6 मौतें
29 साल पहले जिस तरह एक हादसे ने धौलपुर को रुलाया था, एक बार फिर शहर की आंखों में वही आंसू थे। फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार 6 अर्थियां थीं और हर अर्थी के पीछे एक ऐसा परिवार था, जिसकी दुनिया एक झटके में उजड़ गई। दोनों हादसे से जुड़ी यह खबरें भी पढ़िए…