प्रदेश में ओबीसी की 92 में से 11 जातियों का ही राजनीति में दबदबा है। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 92 में से 11 जातियों के ही 1000 से ज्यादा लोगों को राजनीति में भागीदारी मिली है, या उनके जनप्रतिनिधि जीते हैं। इसके अलावा ओबीसी की दूसरी जातियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम मिला है। रिपोर्ट में OBC को निकाय और पंचायत चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के सुझाए गए मापदंडों के हिसाब से आरक्षण देने की सिफारिश की है। इस सिफारिश में ओबीसी की केवल जनसंख्या को ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन को भी आधार बनाया है। ओबीसी आयोग ने बुधवार शाम को सीएम भजनलाल शर्मा से मिलकर रिपोर्ट सौंपी है। दो खंडों में करीब 900 पेज की रिपोर्ट में ओबीसी के क्वांटिफाइड डेटा सर्वे की डिटेल के साथ आयोग ने ओबीसी को आरक्षण देने की सिफारिश की है। ओबीसी की 92 जातियों को फोकस करके रिपोर्ट तैयार की गई है। 74.85 लाख ओबीसी परिवारों का सर्वे करके बनाई रिपोर्ट राजस्थान ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जज मदनलाल भाटी ने रिपोर्ट सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के हिसाब से ओबीसी को निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं में रिजर्वेशन देने की सिफारिश के साथ रिपोर्ट दी है। ओबीसी की सभी 92 जातियों को प्रतिनिधित्व मिले, यह सोचकर रिपोर्ट दी है। ओबीसी के 74 लाख 85 हजार परिवारों का सर्वे किया है। बंद कमरों में बैठकर रिपोर्ट नहीं बनाई रिटायर्ड जज मदनलाल भाटी ने कहा- हमने बंद कमरों में बैठकर रिपोर्ट तैयार नहीं की। सच का सामना करने के लिए जनता के बीच गए हैं। सर्वे करके डेटा लिया है। प्रदेशभर में फील्ड विजिट कर आमजन से संवाद किया। सुझाव लिए और उनके आधार पर निष्कर्ष तैयार किए। ओबीसी वर्ग से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए हैं और उम्मीद है कि इनका लाभ संबंधित वर्ग को मिलेगा। जनसंख्या 20 फीसदी बढ़ी है। हमने 19 पॉइंट पर सर्वे किया। ओबीसी की जातियों के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक पिछड़ेपन का भी आकलन करके ब्योरा दिया है। ओबीसी के लिए किस निकाय में कौनसे वार्ड आरक्षित होंगे, सरकार तय करेगी भाटी ने कहा- कौनसे वार्ड आरक्षित किए जाएंगे। इसका फैसला सरकार और प्रशासन करेंगे। रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं, यह भी सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सरकार स्थानीय निकायों में वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया और लॉटरी का फैसला करेगी। सप्ताह भर में होगी आरक्षण की लॉटरी आयोग की रिपोर्ट के बाद अब शहरी निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं में आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही ओबीसी के लिए वार्ड आरक्षित होंगे। सप्ताहभर में आरक्षण लॉटरी निकालने की तैयारी है। 15 से 17 अगस्त के बीच निकाय चुनावों की घोषणा संभव निकायों में आरक्षण की लॉटरी का काम पूरा होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग 15 से 17 अगस्त के बीच स्थानीय निकाय चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है। हाईकोर्ट में राज्य निर्वाचन आयोग ने यही समय सीमा बताई थी। हाईकोर्ट ने 5 अगस्त तक रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे निकाय और पंचायत चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए समय सीमा तय की थी। ओबीसी आयोग को 5 अगस्त तक रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार ओबीसी आयोग ने सरकार को रिपोर्ट दे दी, जिसके बाद निकाय और पंचायत चुनावों की बड़ी बाधा दूर हो गई है। … यह खबर भी पढ़ें… राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों का पूरा शेड्यूल:5 नवंबर तक अलग-अलग पदों के लिए मतदान होगा, जानिए- कब आएगा रिजल्ट राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों की तारीख तय हो गई है। इस बार राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव की घोषणा करने से पहले उसे हाईकोर्ट को चुनाव की तारीख बतानी पड़ी है। राजस्थान में पंचायत चुनावों की घोषणा 23 सितंबर को होगी। (पूरी खबर पढ़ें) सरकार ने हाईकोर्ट में बताई पंचायत-निकाय चुनाव की तारीख:ओबीसी आयोग 5 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देगा, जानें- कब से हो सकती है वोटिंग राजस्थान में लंबे समय से पंचायत-निकाय चुनाव की घोषणा को लेकर इंतजार किया जा रहा था। वो इंतजार आज खत्म हो गया है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद आज सरकार ने पंचायत और निकाय चुनाव की डेट और शेड्यूल को कोर्ट के सामने रखा। इसके अनुसार अगस्त में प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। (पूरी खबर पढ़ें)
