अलवर शहर में तिजारा फाटक के पास शिव कॉलोनी में घटिया निर्माण की हद हो गई। यहां करीब ढाई से 3 किलोमीटर की दूरी में 95 लाख रुपए की लागत से बन रही नाली एक महीने में तीन बार गिर गई। उसके बाद भी घटिया निर्माण होने लगा तो शुक्रवार को कॉलोनी के लोगों ने निर्माण रुकवा दिया। आमजन की शिकायत के बाद नगर निगम कमिश्नर सोहन सिंह नरूका भी पहुंचे। उसके बाद नाली का निर्माण रुकवा दिया। अब PWD से जांच होगी। उसके बाद ही आगे निर्माण किया जाएगा। हालांकि वन मंत्री संजय शर्मा ने भी अलवर कलेक्टर को लिखित में शिकायत देकर कार्यवाही करने के आदेश दिए हैं। कहा है कि जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की अनदेखी के कारण घटिया निर्माण हुआ है। इसे निरस्त कर उचित कार्यवाही की जाए। पार्षद बोले- महीने में 3 बार टूट चुकी है नाली कॉलोनी के पार्षद सोनू चौधरी ने ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “निर्माण बेहद घटिया दर्जे का हो रहा है। नाली पर लगी ईंटें इतनी कमजोर हैं कि हाथ लगाते ही अपने आप उखड़ रही हैं। अभी तो काम पूरा भी नहीं हुआ और एक महीने के भीतर नाली अलग-अलग जगहों से तीन बार टूट चुकी है। जनता के पैसे की इस बर्बादी को देखकर ही आज महिलाओं और पुरुषों ने मिलकर काम रुकवा दिया।” वहीं, बीजेपी मंडल अध्यक्ष सतीश यादव ने कहा कि घटिया निर्माण को लेकर विभाग को बार-बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यह अधिकारियों की बड़ी लापरवाही है। अब जनता में भारी गुस्सा है और कॉलोनी में केवल गुणवत्तापूर्ण काम ही होने दिया जाएगा। भ्रष्टाचार और लाचारी की 3 तस्वीरें खुद के खर्च पर सीमेंट खरीद रहे लोग नाली निर्माण में सीमेंट नाममात्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालत यह है कि मजबूरी में कॉलोनी के लोग अपने घरों के आगे का नाला बनवाते समय खुद अपनी जेब से दो-दो कट्टे सीमेंट खरीदकर ठेकेदार के मजदूरों को दे रहे हैं, ताकि कम से कम उनके घर के सामने का हिस्सा मजबूत बन सके। नए JEW बोले- ‘ऐसे घटिया काम की जिम्मेदारी नहीं ले सकता’ ठेकेदार की मनमर्जी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दो दिन पहले ही चार्ज संभालने वाले नए जेईएन (JEN) ने खुद अधिकारियों को लिखित में शिकायत दी है कि वे इस प्रोजेक्ट पर काम नहीं करवा पाएंगे, क्योंकि निर्माण बहुत ही घटिया दर्जे का हो रहा है। पहले भी गिर चुकी है गाज तितारा शिव कॉलोनी का यह नाला शुरू से ही विवादों में रहा है। इस काम में लापरवाही और घटिया मॉनिटरिंग के चलते इससे पहले भी एक जेईएन (JEN) को एपीओ (APO) किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद ठेकेदार की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया।
