राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के नारी निकेतन, बालिका गृह, बाल गृह और फोस्टर होम की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर राज्य सरकार के अधिकारियों को फटकार लगाई है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- हमारे समक्ष पेश किए गए हलफनामे वास्तविक जानकारी देने के बजाय एक जैसे तैयार किए गए (कॉपी-पेस्ट) दस्तावेज हैं, जिन पर अधिकारियों ने केवल हस्ताक्षर कर दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने जयपुर और जोधपुर से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। बता दें कि यह मामला अलवर बालिका गृह में रह रही बालिकाओं की शिकायत के आधार पर शुरू हुआ था, जिसमें संस्था को अनुदान नहीं मिलने और अन्य बुनियादी समस्याओं का उल्लेख किया गया था। 20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई सुनवाई के दौरान विभिन्न जिलों के नारी निकेतन, बालिका गृह, ऑब्जर्वेशन होम और जिला बाल संरक्षण इकाइयों के अधिकारी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा- पूर्व आदेश के अनुसार सभी संस्थानों की वास्तविक जरूरतों, उपलब्ध सुविधाओं, कर्मचारियों की स्थिति और कमियों का अलग-अलग विवरण प्रस्तुत किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। खंडपीठ ने सख्त निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले के अधिकारी अपने-अपने संस्थान की वर्तमान स्थिति का विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। इसके साथ ही भवन, आवासीय व्यवस्था और अन्य सुविधाओं की नवीनतम तस्वीरें (फोटोग्राफ्स) भी रिकॉर्ड पर पेश करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब केवल औपचारिक रिपोर्टों से संतोष नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई अब 20 जुलाई को होगी।
