राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर नगर निगम के ढीले रवैये पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने 15 साल की देरी के एक मामले में नगर निगम कमिश्नर को 20 जुलाई 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने किरण और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सख्त रुख अपनाया। याचिकाकर्ताओं के वकील ऋषि सोनी ने कोर्ट को बताया कि साल 2011 में नगर निगम की एक संपत्ति के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई थी। पूरी रकम जमा कराने के बावजूद, उन्हें पिछले 15 सालों से न तो जमीन का कब्जा दिया गया और न ही रजिस्ट्री की गई। कोर्ट ने कहा- ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की नगर निगम के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि जमीन पर अवैध कब्जा हो गया है। उन्होंने हाल ही में 5 जुलाई 2026 को अखबार में एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए पूछा कि जमीन के रखवाले होने के नाते एक दशक से अधिक समय तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों के नाम मांगे हाईकोर्ट ने नगर निगम को साल 2011 से लेकर अब तक पद पर रहे उन सभी अधिकारियों के नाम सौंपने का निर्देश दिया है, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। कमिश्नर को अब कोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि इन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ नामजद कार्रवाई क्यों न की जाए और उनके खिलाफ कड़े अनुशासनात्मक कदम क्यों न उठाए जाएं।
